25 साल पुराना विक्रमशिला सेतु हुआ क्षतिग्रस्त: भागलपुर की लाइफलाइन पर संकट
गंगा में समाया पुल का हिस्सा, आवाजाही पूरी तरह बंद
भागलपुर: विक्रमशिला सेतु, जो बिहार की एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा मानी जाती है, अब गंभीर संकट का सामना कर रहा है। मई 2026 में इस पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में समा गया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से इस पर आवाजाही रोक दी है।
भागलपुर को जोड़ने वाला प्रमुख पुल
करीब 4.7 किलोमीटर लंबा यह पुल भागलपुर को नवगछिया और उत्तर बिहार के कई जिलों से जोड़ता है। यह सेतु न केवल स्थानीय यातायात बल्कि व्यापार और आवागमन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता रहा है।
निर्माण और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस पुल का निर्माण 1990 के दशक में शुरू हुआ था और वर्ष 2001 में इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया। इसका उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने 23 जुलाई 2001 को किया था। इस परियोजना का निर्माण UP Bridge Corporation द्वारा किया गया था।
नाम के पीछे ऐतिहासिक महत्व
इस पुल का नाम प्राचीन काल के प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र विक्रमशिला विश्वविद्यालय के सम्मान में रखा गया है, जिसकी स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। यह विश्वविद्यालय भारत के प्राचीन शिक्षा केंद्रों में से एक था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रहा है।
बार-बार मरम्मत के बावजूद नहीं टली समस्या
पिछले कुछ वर्षों में इस पुल की कई बार मरम्मत की जा चुकी थी, जिससे इसकी जर्जर स्थिति का संकेत पहले ही मिल चुका था। इसके बावजूद अब पुल का एक हिस्सा गंगा में समा जाना गंभीर इंजीनियरिंग और रखरखाव संबंधी सवाल खड़े करता है।
दो-लेन पुल पर बढ़ता दबाव
यह पुल दो-लेन संरचना वाला है, जबकि वर्षों में वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते ट्रैफिक लोड और समय पर उचित रखरखाव न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है।
कनेक्टिविटी पर पड़ा सीधा असर
पुल के बंद होने से भागलपुर, नवगछिया और सीमांचल क्षेत्र के बीच आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। इसका असर न केवल आम लोगों की दैनिक जिंदगी पर पड़ रहा है, बल्कि व्यापार और परिवहन गतिविधियों पर भी व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है।
प्रशासन के सामने चुनौती
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था कैसे की जाए और पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण को कितनी जल्दी पूरा किया जाए। स्थानीय लोगों ने सरकार से जल्द समाधान की मांग की है, ताकि इस महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी को बहाल किया जा सके।
सुरक्षा और जांच की जरूरत
इस घटना के बाद पुलों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए समय-समय पर संरचनात्मक जांच और निगरानी बेहद जरूरी है। विक्रमशिला सेतु का क्षतिग्रस्त होना केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा पर संकट है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इस स्थिति से निपटने के लिए कितनी तेजी और गंभीरता से कदम उठाती हैं।






