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झारखंड: अलका तिवारी बनीं राज्य की पहली महिला राज्य निर्वाचन आयुक्त, विजयदशमी पर संभाला पदभार

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रांची: विजयदशमी के शुभ अवसर पर झारखंड की पूर्व मुख्य सचिव अलका तिवारी ने राज्य के 8वें राज्य निर्वाचन आयुक्त (State Election Commissioner) का पदभार ग्रहण किया। उन्होंने 2 अक्टूबर 2025 को राजधानी रांची के रातू रोड स्थित राज्य निर्वाचन आयोग कार्यालय में कार्यभार संभाला।

इस नियुक्ति को लेकर राज्य भर में चर्चा का माहौल है, क्योंकि पहली बार झारखंड को एक महिला राज्य निर्वाचन आयुक्त मिला है। प्रशासनिक क्षेत्र में अपने सख्त और पारदर्शी कार्यशैली के लिए पहचानी जाने वाली अलका तिवारी अब झारखंड की चुनावी प्रक्रिया की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगी।

पहले भी परिवार से जुड़ा रहा है यह पद
गौरतलब है कि अलका तिवारी से पहले उनके पति और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव डी.के. तिवारी भी इसी पद पर कार्यरत रह चुके हैं। उन्होंने 12 फरवरी 2021 को राज्य निर्वाचन आयुक्त का पदभार ग्रहण किया था और 13 अगस्त 2024 तक इस जिम्मेदारी को निभाया। उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद यह पद लगभग 14 महीने तक रिक्त रहा। अब अलका तिवारी की नियुक्ति से इस पद को स्थायी स्वरूप मिला है।

चुनावी पारदर्शिता होगी पहली प्राथमिकता
कार्यभार संभालने के बाद अलका तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता राज्य में निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत लोगों का विश्वास है और चुनाव आयोग की भूमिका इस विश्वास को बनाए रखने में सबसे अहम होती है।

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उन्होंने यह भी कहा कि आयोग मतदाताओं की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा। ग्रामीण और शहरी दोनों स्तरों पर चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

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पंचायत और निकाय चुनाव पर निगाहें
झारखंड राज्य निर्वाचन आयोग के अंतर्गत पंचायत चुनाव और नगर निकाय चुनावों का आयोजन होता है। अगले वर्ष इन चुनावों की तैयारियां शुरू होंगी और माना जा रहा है कि अलका तिवारी की अगुवाई में आयोग पहले से कहीं अधिक संगठित और प्रभावी ढंग से कार्य करेगा।

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विशेषज्ञ मानते हैं कि अलका तिवारी की प्रशासनिक पृष्ठभूमि और अनुभव चुनावी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उनके कार्यकाल में स्वच्छ और पारदर्शी चुनाव कराना आयोग की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

अलका तिवारी का प्रशासनिक सफर
अलका तिवारी झारखंड की नौकरशाही में एक जाना-पहचाना नाम हैं। मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने न केवल राज्य प्रशासनिक तंत्र को मजबूती दी बल्कि कई महत्वपूर्ण योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में भी अहम भूमिका निभाई। वे कड़े फैसलों और ईमानदार कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास योजनाओं को आगे बढ़ाने में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके नेतृत्व में राज्य ने कई सामाजिक और विकासात्मक परियोजनाओं में गति पकड़ी।

महिला नेतृत्व की नई मिसाल
अलका तिवारी की नियुक्ति को महिला नेतृत्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह न सिर्फ प्रशासनिक दृष्टिकोण से अहम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि लोकतांत्रिक संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ रही है।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों की प्रतिक्रिया
राजनीतिक हलकों में उनकी नियुक्ति को सकारात्मक कदम बताया जा रहा है। कई नेताओं और संगठनों ने विश्वास जताया है कि उनके नेतृत्व में राज्य निर्वाचन आयोग अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनेगा।

सोशल मीडिया पर भी उनकी नियुक्ति को लेकर चर्चाएँ हो रही हैं। लोग इसे “विजयदशमी पर महिला शक्ति का सशक्त संदेश” कहकर संबोधित कर रहे हैं।

आने वाली चुनौतियाँ
हालांकि उनके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं, ग्रामीण इलाकों में निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना, मतदान प्रतिशत को बढ़ाना, नकली वोटिंग और दबाव की राजनीति को रोकना
और तकनीकी पारदर्शिता बनाए रखना। इन चुनौतियों का सामना करने में उनका प्रशासनिक अनुभव निश्चित रूप से काम आएगा।

विजयदशमी जैसे शुभ दिन पर झारखंड की पूर्व मुख्य सचिव अलका तिवारी का राज्य की 8वीं निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभालना राज्य की लोकतांत्रिक यात्रा के लिए नई शुरुआत का संकेत है। अब पूरे राज्य की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि उनके नेतृत्व में आने वाले पंचायत और निकाय चुनाव किस तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष ढंग से संपन्न होते हैं।

कुल मिलाकर, अलका तिवारी का निर्वाचन आयुक्त बनना झारखंड की लोकतांत्रिक परंपरा को और मजबूती देगा और महिला नेतृत्व की एक नई मिसाल कायम करेगा।

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