नीतीश कुमार की ‘दसवीं पारी’ तय? जदयू बोली—एग्जिट पोल नहीं, जनादेश साफ है

Bihar Politics

बिहार : बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी तापमान चरम पर है। एक तरफ जहाँ सभी एग्जिट पोल एनडीए की भारी जीत और नीतीश कुमार की सत्ता में वापसी का संकेत दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जदयू ने दावा किया है कि “नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।”

बिहार के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार होगा जब कोई नेता 10वीं बार मुख्यमंत्री बनकर नया रिकॉर्ड बनाएगा।
जदयू नेताओं का कहना है कि एग्जिट पोल सिर्फ संकेत नहीं बल्कि इस बार जनता के मूड की सटीक झलक हैं। जदयू का दावा — “जनता ने विकास को वोट दिया” जदयू के कई वरिष्ठ नेताओं ने मीडिया से कहा क

“बिहार की जनता ने महागठबंधन की नकारात्मक राजनीति को नकार दिया है। नीतीश कुमार के शासन, विकास और सामाजिक सुरक्षा के मॉडल पर जनता ने भरोसा जताया है। 14 नवंबर को इतिहास दोहराया जाएगा।” एनडीए कैंप का मनोबल एग्जिट पोल के बाद साफ तौर पर ऊँचा दिख रहा है।

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एग्जिट पोल्स में एनडीए की लहर
लगभग सभी प्रमुख सर्वे बता रहे हैं कि—

  • एनडीए आराम से बहुमत पार करेगा
  • जदयू के प्रदर्शन में सुधार
  • भाजपा 70-80 सीटों के बीच
  • राजद 60-70 सीटों तक सीमित
  • कांग्रेस घटती दिख रही है
  • प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी का खाता खुलना मुश्किल
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इससे साफ है कि यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो नीतीश कुमार की सत्ता में शानदार वापसी होगी। तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल्स को खारिज किया महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने एग्जिट पोल्स को सिरे से नकार दिया है।

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तेजस्वी ने कहा—

“एग्जिट पोल्स भाजपा प्रायोजित हैं। असली नतीजा 14 नवंबर को आएगा और वह महागठबंधन के पक्ष में होगा।
बिहार में बदलाव तय है।”

महागठबंधन का दावा है कि उन्हें गांवों, कस्बों और युवाओं का व्यापक समर्थन मिला है।

14 नवंबर—निर्णायक दिन
वोटों की गिनती 14 नवंबर की सुबह 8 बजे से शुरू होगी। हर राउंड के साथ बिहार के अगले 5 वर्षों की दिशा तय होगी।सीमांचल, मगध, भोजपुर और शहरी पटना की सीटें इस चुनाव का दिल हैं। कई सीटों पर कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है।

क्यों खास है नीतीश की संभावित ‘10वीं पारी’?

  • बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री
  • विकास, शिक्षा और सुशासन का मॉडल
  • गठबंधन बदलने के बाद भी जनसमर्थन में कमी नहीं
  • एनडीए में ‘सबसे स्वीकार्य चेहरा’

यदि नीतीश फिर सत्ता में आते हैं, तो यह उनके राजनीतिक कौशल और जनता के भरोसे की एक बार फिर बड़ी जीत होगी।

बिहार में अंतिम फैसला अब सिर्फ घंटे भर की दूरी पर है। जहाँ जदयू और एनडीए अपनी जीत को सुनिश्चित मान रहे हैं, वहीं महागठबंधन उम्मीदों पर कायम है। सस्पेंस बरकरार है—और 14 नवंबर को तस्वीर साफ होगी कि बिहार जंगलराज, परिवर्तन या सुशासन में से किस ओर गया है।

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