NEET 2026 में गड़बड़ी का आरोप: टॉपर शांभवी तिवारी ने उठाए सवाल
परीक्षा केंद्र पर अव्यवस्था का आरोप, NTA से लेकर PMO तक शिकायत
जमशेदपुर: शहर में आयोजित NEET UG-2026 परीक्षा भले ही प्रशासनिक स्तर पर शांतिपूर्ण बताई जा रही हो, लेकिन एक मेधावी छात्रा की शिकायत ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। CISCE बायोसाइंस की टॉपर और सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की छात्रा शांभवी तिवारी ने परीक्षा के दौरान भारी अव्यवस्था और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक शिकायत दर्ज कराई गई है।
सोशल मीडिया पर उठी आवाज
शांभवी के परिचित राजेश कुमार सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि गोलमुरी स्थित एबीएम कॉलेज परीक्षा केंद्र पर NTA की गाइडलाइनों का पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि परीक्षा के दौरान अव्यवस्था और असमानता का माहौल बना रहा, जिससे छात्रों को मानसिक दबाव और समय की कमी का सामना करना पड़ा।
परीक्षा के दौरान लगातार व्यवधान
आरोपों के अनुसार, दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक चलने वाली परीक्षा के दौरान निरीक्षक लगातार छात्रों को डिस्टर्ब करते रहे। इससे परीक्षार्थियों की एकाग्रता प्रभावित हुई और कई छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ी। छात्रा और उसके परिजनों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों ने परीक्षा के माहौल को बाधित किया और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए।
नियमों की अनदेखी के आरोप
शांभवी के पिता राकेश रमन ने बताया कि NTA के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद परीक्षा के बीच में कई बार थंब इम्प्रेशन लिया गया और अलग-अलग जगहों पर साइन कराए गए। इसके अलावा बार-बार एडमिट कार्ड और फोटो की जांच भी की गई, जबकि ये प्रक्रियाएं परीक्षा शुरू होने से पहले या परीक्षा समाप्ति के बाद की जानी चाहिए थीं। उनका कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से छात्रों का ध्यान भटका और परीक्षा देने में बाधा उत्पन्न हुई।
निष्पक्षता पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने NEET जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा और उसके परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों और छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित हो सके।
जमशेदपुर में NEET UG-2026 परीक्षा को लेकर उठे ये सवाल शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। अब देखना होगा कि NTA और संबंधित एजेंसियां इस मामले पर क्या कार्रवाई करती हैं और क्या छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता है।





