...

टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी, दो जिंदगियां खत्म: कार्रवाई में डॉक्टर निलंबित

Rajnagar CHC Death Case

मुनादी Live की खबर के बाद हरकत में आया विभाग

रांची/सरायकेला: झारखंड के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान मां और नवजात की मौत के मामले में आखिरकार बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। मामले के सामने आने और मीडिया में प्रमुखता से उठाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रभारी चिकित्सक डॉ. शिवलाल कुंकल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

संयुक्त सचिव ने जारी किया आदेश
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव छवि रंजन ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसी गंभीर लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी को सख्त सजा दी जाएगी।

निलंबन के दौरान चाईबासा में रहेगा मुख्यालय
जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान डॉ. कुंकल का मुख्यालय चाईबासा निर्धारित किया गया है। उन्हें प्रतिदिन अपनी उपस्थिति दर्ज करनी होगी और यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे कहीं अन्यत्र कार्यरत नहीं हैं। निर्देशों के पालन के बाद ही उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

Maa RamPyari Hospital

Telegram channel

क्या था पूरा मामला
यह पूरा मामला सरायकेला जिले के हाथीसिरिंग गांव की रहने वाली बिनीता बानरा से जुड़ा है, जो स्वयं एक स्वास्थ्य सहिया थीं। वह प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचीं, लेकिन वहां की अव्यवस्था और लापरवाही ने उनकी और उनके नवजात बेटे की जान ले ली।

resizone elanza

बिजली गुल, टॉर्च की रोशनी में इलाज
परिजनों के अनुसार, प्रसव के दौरान अचानक अस्पताल की बिजली चली गई। इसके बाद मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराने की कोशिश की गई, जो अपने आप में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर पोल खोलती है।

उपकरणों की कमी और लापरवाही के आरोप
परिवार ने आरोप लगाया कि अस्पताल में जरूरी चिकित्सा उपकरणों की भारी कमी थी। न तो डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने समय पर संवेदनशीलता दिखाई और न ही मरीज को समय रहते बड़े अस्पताल में रेफर किया गया। महिला की हालत बिगड़ती रही, लेकिन इलाज में गंभीरता नहीं दिखाई गई।

खुशियां मातम में बदलीं
बिनीता बानरा पहले से दो बेटियों की मां थीं और इस बार बेटे के जन्म की खुशी परिवार में थी। लेकिन कुछ ही देर में नवजात और मां दोनों की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

ग्रामीणों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
घटना के बाद परिजन और ग्रामीण काफी आक्रोशित हो गए। उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की। सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच का आश्वासन दिया।

अस्पतालों को मिलते हैं लाखों रुपये
स्वास्थ्य विभाग ने यह भी बताया कि राज्य के सभी सीएचसी को मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना के तहत हर साल 10 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसके बावजूद इस तरह की घटना सामने आना सिस्टम की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

जांच जारी, और कार्रवाई संभव
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और विभाग ने संकेत दिए हैं कि आगे और भी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

बड़ा सवाल: कब सुधरेगी स्वास्थ्य व्यवस्था?
यह घटना एक बार फिर राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।जब एक स्वास्थ्य सहिया, जो खुद सिस्टम का हिस्सा थी, उसे भी समय पर इलाज नहीं मिल पाया, तो आम लोगों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। राजनगर CHC की यह घटना केवल एक लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता का प्रतीक है। हालांकि कार्रवाई शुरू हो चुकी है, लेकिन असली जरूरत है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जमीनी स्तर पर सुधार किए जाएं।

सरायकेला में प्रसव के दौरान मां नवजात की मौत, अंधेरे में टॉर्च की रोशनी में चला इलाज।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *