अविनाश कुमार का बड़ा आदेश: झारखंड में लेखा कर्मियों के तबादले होंगे
3 साल से जमे कर्मचारियों को हटाने का निर्देश, आउटसोर्स कर्मियों पर भी लगी रोक
रांची: झारखंड में फर्जी वेतन विपत्र के जरिए करोड़ों रुपये की निकासी के मामले ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है। इस घोटाले के बाद अब राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए वित्तीय कार्यों से जुड़े कर्मचारियों के तबादले का बड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव और उपायुक्तों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि एक ही स्थान पर तीन वर्षों से जमे लेखा कर्मियों को 30 मई तक स्थानांतरित किया जाए।
किन कर्मचारियों पर गिरेगी गाज
सरकार के इस आदेश के तहत उन सभी कर्मचारियों को हटाने की बात कही गई है, जो लंबे समय से एक ही जगह पर तैनात हैं और वित्तीय कार्यों से जुड़े हुए हैं। इनमें वरीय लेखा सहायक, लेखा सहायक, लेखा अधीक्षक, लेखापाल और विपत्र लिपिक जैसे पद शामिल हैं। सरकार का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती से सिस्टम में गड़बड़ी और अनियमितता की संभावना बढ़ जाती है, जिसे रोकने के लिए यह कदम जरूरी है।
आउटसोर्स और संविदा कर्मियों पर भी सख्ती
मुख्य सचिव ने एक और महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि संविदा, आउटसोर्स और मानदेय पर कार्यरत कर्मियों को लेखा और वित्तीय कार्यों से दूर रखा जाए। इस आदेश का उद्देश्य वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में किसी तरह के घोटाले की संभावना कम हो सके।
जमीनी हकीकत: आसान नहीं होगा फैसला लागू करना
हालांकि, सरकारी कार्यालयों के जानकारों का कहना है कि इस आदेश को पूरी तरह लागू करना आसान नहीं होगा। दरअसल, राज्य सरकार के अधिकांश कार्यालयों में नियमित कर्मचारियों की कमी है और कामकाज काफी हद तक आउटसोर्स या संविदा पर नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों के भरोसे चल रहा है।
सिस्टम आउटसोर्स कर्मियों पर निर्भर
पिछले कई वर्षों में टाइपिस्ट और अन्य सहायक पदों पर नई नियुक्तियां नहीं होने के कारण कार्यालयों में तकनीकी कार्यों के लिए आउटसोर्स कर्मियों पर निर्भरता बढ़ गई है। ये कर्मचारी न केवल फाइलों और दस्तावेजों को संभालते हैं, बल्कि कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और संचिकाओं की जानकारी भी इन्हीं के पास होती है। सचिवालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों तक, कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका काफी प्रभावी हो चुकी है। ऐसे में उन्हें अचानक वित्तीय कार्यों से अलग करना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है।
संतुलन बनाना होगी सबसे बड़ी चुनौती
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ वित्तीय अनियमितताओं को रोकना और दूसरी तरफ प्रशासनिक कामकाज को सुचारू बनाए रखना। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस आदेश को लागू करना है, तो इसके साथ ही नियमित पदों पर नियुक्ति और सिस्टम को मजबूत करने के लिए ठोस कदम भी उठाने होंगे।
फर्जी वेतन घोटाले के बाद झारखंड सरकार का यह फैसला प्रशासनिक सख्ती का संकेत देता है। लेखा कर्मियों के तबादले और आउटसोर्स कर्मचारियों पर नियंत्रण से वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं होगा। अब देखना होगा कि सरकार इस फैसले को किस तरह जमीन पर उतारती है और क्या इससे भविष्य में ऐसे घोटालों पर रोक लग पाती है या नहीं।






