पूर्वी सिंहभूम की 28 छात्राएं ISRO के श्रीहरिकोटा केंद्र के शैक्षणिक भ्रमण पर रवाना

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मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिला प्रशासन की पहल से सरकारी स्कूलों की छात्राओं को मिला अंतरिक्ष विज्ञान से सीखने का अवसर

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले की 28 प्रतिभाशाली छात्राओं को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा का दौरा करने का सुनहरा अवसर मिला है। यह शैक्षणिक भ्रमण मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिला प्रशासन की सक्रिय पहल का परिणाम है, जिसका उद्देश्य छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना है।

चयनित छात्राओं की पृष्ठभूमि
इन छात्राओं का चयन जिले के विभिन्न सरकारी और आवासीय विद्यालयों से किया गया है, जिनमें पीएम-श्री कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, आश्रम आवासीय विद्यालय, झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय, और सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं। चयन प्रक्रिया में शैक्षणिक प्रदर्शन, विज्ञान विषय में रुचि और सीखने की ललक जैसे मानदंडों को प्राथमिकता दी गई।

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उपायुक्त ने दी शुभकामनाएं
जिले के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने समाहरणालय परिसर से इन छात्राओं को रवाना किया। उन्होंने कहा —

“हमारी बच्चियां न केवल झारखंड का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन करेंगी। इसरो का दौरा उनके लिए एक प्रेरणादायक अनुभव होगा, जिससे वे विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लेंगी।”

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यात्रा का सफर
समाहरणालय परिसर से छात्राओं को बस द्वारा बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची ले जाया गया। वहां से वे हवाई मार्ग से चेन्नई रवाना हुईं। चेन्नई पहुंचने के बाद बस से वे श्रीहरिकोटा स्थित इसरो केंद्र जाएंगी, जहां वे रॉकेट लॉन्चिंग सुविधाओं, सैटेलाइट असेंबली, मिशन कंट्रोल रूम और अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक ढांचों का निरीक्षण करेंगी।

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इसरो भ्रमण का महत्व
सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा, देश का प्रमुख लॉन्च पैड है, जहां से अधिकांश उपग्रह प्रक्षेपण होते हैं। यहां छात्राओं को रॉकेट विज्ञान, उपग्रह प्रौद्योगिकी, और अंतरिक्ष मिशन संचालन की वास्तविक प्रक्रिया देखने का अवसर मिलेगा। इस तरह का प्रत्यक्ष अनुभव उनकी वैज्ञानिक सोच, शोध प्रवृत्ति और नवाचार क्षमता को और भी मजबूत करेगा।

अध्यापकों और प्रशासनिक टीम की भूमिका
इस शैक्षणिक भ्रमण में छात्राओं के साथ कार्यपालक दंडाधिकारी मृत्युंजय कुमार और प्रशिक्षकों की एक टीम भी गई है, जो पूरे दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा और मार्गदर्शन सुनिश्चित करेगी। जिला शिक्षा पदाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने भी इस पहल को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की बच्चियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री की शिक्षा दृष्टि
झारखंड सरकार ने हाल के वर्षों में STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री की प्रेरणा से ही यह विशेष पहल हुई, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को भी वैश्विक स्तर की वैज्ञानिक संस्थाओं का अनुभव मिल सके।

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मुख्यमंत्री ने पहले भी कहा है —

“झारखंड की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। हमें उन्हें वह मंच देना होगा, जहां वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें।”

भविष्य की प्रेरणा
इसरो का दौरा न केवल एक शैक्षणिक यात्रा है, बल्कि यह छात्राओं के लिए करियर और जीवन दिशा तय करने का एक अहम मोड़ भी हो सकता है। कई छात्राओं ने यात्रा से पहले ही कहा कि वे भविष्य में वैज्ञानिक या इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं।

स्थानीय समाज की प्रतिक्रिया
इस पहल को लेकर जिले में उत्साह का माहौल है। अभिभावकों और शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के अवसर से बच्चों में नई ऊंचाइयों को छूने का आत्मविश्वास पैदा होता है। स्थानीय समाज ने जिला प्रशासन के प्रयास की सराहना की और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में ऐसी पहलें और भी बढ़ेंगी।

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पूर्वी सिंहभूम की 28 छात्राओं का इसरो भ्रमण झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। यह पहल न केवल बेटियों को विज्ञान और तकनीक से जोड़ने का प्रयास है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की छात्राएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

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