DAV नंदराज में मानसिक स्वास्थ्य पर कार्यशाला, 180 शिक्षकों ने लिया हिस्सा
CBSE निर्देशानुसार छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर एकदिवसीय आयोजन
रांची: डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल, बरियातू में शुक्रवार, 01 मई 2026 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के निर्देशानुसार “छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आठ घंटे के प्रशिक्षण कार्यक्रम में आर्य ज्ञान प्रचार समिति समूह के विभिन्न विद्यालयों—डीएवी नंदराज पब्लिक स्कूल (बुटी मोड़), डीएवी नंदराज मॉडर्न स्कूल (लालपुर) तथा नारायण दास ग्रोवर डीएवी पब्लिक स्कूल (बुंडू) के लगभग 180 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. रविप्रकाश तिवारी, प्राचार्य दीपक कुमार, हेडमिस्ट्रेस झूंपा सिंह, मोनिका पाठक और शिल्पी गुप्ता उपस्थित रहे।
मानसिक स्वास्थ्य को समझना जरूरी: डॉ. रविप्रकाश तिवारी
कार्यशाला के प्रथम सत्र में प्राचार्य डॉ. रविप्रकाश तिवारी ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान युग चिंता और मानसिक दबाव का दौर बन चुका है। उन्होंने कहा कि पहले जहां “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क” की बात कही जाती थी, वहीं आज मानसिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने आयुर्वेद का उदाहरण देते हुए बताया कि स्वास्थ्य का अर्थ केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक संतुलन भी है।

वर्तमान में जीने की सीख
डॉ. तिवारी ने कहा कि अधिकांश लोग या तो भूतकाल के दुख में उलझे रहते हैं या भविष्य की चिंता में वर्तमान को खराब कर लेते हैं। उन्होंने जीवन को क्रिकेट के खेल से जोड़ते हुए कहा कि “जो गेंद सामने है, उसी पर ध्यान देना चाहिए।” योग, प्राणायाम, सत्संग, अच्छी पुस्तकों का अध्ययन और संतोष की भावना को उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख उपाय बताया।
शिक्षकों को सजग रहने की सलाह
कार्यशाला में प्राचार्य दीपक कुमार और हेडमिस्ट्रेस झूंपा सिंह ने भी शिक्षकों को संबोधित करते हुए छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बदलते समय में बच्चों पर पढ़ाई, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव बढ़ रहा है, ऐसे में शिक्षकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

डिप्रेशन के संकेत पहचानना जरूरी
रिसोर्स पर्सन मोनिका पाठक ने कहा कि बच्चों में मानसिक तनाव और डिप्रेशन के संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि खाने-पीने की आदतों में बदलाव, निराशा, बार-बार गुस्सा आना, मूड स्विंग, अकेलापन महसूस करना जैसे लक्षण मानसिक समस्या की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे बच्चों से संवाद करना, उनकी बात सुनना, धैर्य रखना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना चाहिए।
सकारात्मक जीवनशैली का महत्व
दूसरी रिसोर्स पर्सन शिल्पी गुप्ता ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक जीवनशैली अपनाना जरूरी है। उन्होंने संवाद बनाए रखने, मदद मांगने, परिवार से जुड़े रहने, पर्याप्त नींद लेने और सक्रिय जीवन जीने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों के साथ सख्ती, उपेक्षा या दंड के बजाय अपनापन और समझदारी से व्यवहार करना अधिक प्रभावी होता है।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन
कार्यक्रम के अंत में मोनिका पाठक ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मधुर संगीत और शांति पाठ के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।DAV नंदराज पब्लिक स्कूल में आयोजित यह कार्यशाला शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इससे न केवल शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता मिली, बल्कि वे अब छात्रों के भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक विकास में भी बेहतर भूमिका निभा सकेंगे। ऐसे आयोजन शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।






