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पिठोरिया की बेटी सारा अल्तमश का कमाल: झारखंड अंडर-17 क्रिकेट टीम में चयन, पहले ही मैच में चमकी

Sara Altamash Cricket

पिठोरिया/रांची: रांची के कांके प्रखंड अंतर्गत पिरुटोला इचापिड़ी गांव की रहने वाली सारा अल्तमश ने अपनी मेहनत और लगन से एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सारा का चयन नेशनल स्कूल गेम फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) के तहत अंडर-17 गर्ल्स झारखंड राज्य क्रिकेट टीम में हुआ है, जिससे न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है।

रोहतक में राष्ट्रीय स्तर पर दिखा रही प्रतिभा
यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 29 अप्रैल से 3 मई 2026 तक हरियाणा के रोहतक में आयोजित किया जा रहा है। सारा ने अपने पहले ही मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए गुजरात के खिलाफ मुकाबले में 2 विकेट लेकर अपनी क्षमता का दमदार परिचय दिया है।

कोच के मार्गदर्शन में निखरी प्रतिभा
सारा फिलहाल रांची स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही हैं, जहां उन्हें अनुभवी कोच अनीसुर रहमान का मार्गदर्शन मिल रहा है। कोच के अनुसार, सारा एक प्रतिभाशाली मध्यम गति की गेंदबाज हैं, जिनकी लाइन-लेंथ और नियंत्रण उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि सारा में भविष्य में उच्च स्तर तक पहुंचने की पूरी क्षमता है, बशर्ते वह इसी तरह मेहनत जारी रखें।

पढ़ाई और खेल का संतुलन
सारा इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल कांके की 10वीं कक्षा की छात्रा हैं। उन्होंने पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन बनाकर यह साबित किया है कि सही दिशा और समर्पण से दोनों क्षेत्रों में सफलता हासिल की जा सकती है।

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परिवार का समर्थन बना ताकत
सारा के पिता मुस्ताक अहमद मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हैं और अपनी क्लिनिक के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की सेवा करते हैं। वहीं उनकी माता तरन्नुम निशा एक गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा अपनी बेटी के सपनों को समर्थन दिया। परिजनों के अनुसार, सारा को बचपन से ही क्रिकेट में गहरी रुचि थी और इसी जुनून को देखते हुए उसे पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट की ट्रेनिंग दिलाई गई।

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गांव से उठकर राष्ट्रीय मंच तक
पिरुटोला जैसे छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना सारा की मेहनत, संघर्ष और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से कोई भी ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

बेटियों के लिए प्रेरणा
सारा की उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए यह संदेश है कि वे भी अपने सपनों को साकार कर सकती हैं।

भविष्य का लक्ष्य: देश के लिए खेलना
सारा के परिवार की सबसे बड़ी इच्छा है कि एक दिन वह भारत का प्रतिनिधित्व करें और देश के लिए ट्रॉफी जीतें। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए यह सपना अब दूर नहीं लगता। सारा अल्तमश की सफलता यह दर्शाती है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी यह उपलब्धि झारखंड के खेल जगत के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है, जो आने वाले समय में और प्रतिभाओं को प्रेरित करेगी।

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