महिला आरक्षण बिल पर आज वोटिंग, संसद में सरकार बनाम विपक्ष आमने-सामने
संसद में महिला आरक्षण बिल पर आज निर्णायक वोटिंग, सियासी घमासान तेज
PM मोदी ने बताया ऐतिहासिक फैसला, विपक्ष ने उठाए सवाल; परिसीमन पर भी गरमाई बहस
नई दिल्ली: नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र का आज दूसरा दिन देश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर आज शाम 4 बजे से मतदान होना है। यह सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में देश की राजनीति की दिशा तय करने वाला क्षण माना जा रहा है। महिला आरक्षण विधेयक, जिसे ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के नाम से जाना जाता है, पहले ही 2023 में संसद से पारित हो चुका है। अब इसे लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जो 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर प्रभावी होगी।
PM मोदी: “यह लोकतंत्र का ऐतिहासिक क्षण”
नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान इसे भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में भावनात्मक अंदाज अपनाते हुए कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ ऐसे अवसर आते हैं, जो इतिहास में मील का पत्थर बन जाते हैं। उन्होंने कहा, “हम लोकतंत्र की जननी हैं और हमारी हजार वर्षों की विकास यात्रा रही है। यह फैसला उसी यात्रा को आगे बढ़ाने वाला है।”
परिसीमन पर दिया भरोसा
परिसीमन को लेकर खासकर दक्षिण भारत के राज्यों में उठ रही आशंकाओं पर प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा और पहले से तय अनुपात में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “जब हमारी नीयत साफ है, तो हमें शब्दों के खेल की जरूरत नहीं है। मैं गारंटी देता हूं कि किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा।”
अमित शाह का पलटवार
अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि परिसीमन को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया से दक्षिण भारत के राज्यों की हिस्सेदारी कम नहीं बल्कि बढ़ेगी। शाह ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और सभी राज्यों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।
विपक्ष का हमला, प्रियंका गांधी का तंज
विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रियंका गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण की अवधारणा सबसे पहले कांग्रेस लेकर आई थी, जबकि उस समय बीजेपी इसका विरोध कर रही थी। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर महिला सशक्तिकरण की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर ओबीसी वर्ग के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है। प्रियंका गांधी ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि अगर चाणक्य आज जीवित होते, तो सत्ता की राजनीति देखकर चकित रह जाते।
संसद में तीखी बहस और राजनीतिक संदेश
महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। जहां सरकार इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति और चुनावी एजेंडा करार दे रहा है। यह बहस केवल संसद तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’?
इस विधेयक के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, यह आरक्षण तुरंत लागू नहीं होगा, बल्कि अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा। यही कारण है कि विपक्ष इस पर सवाल उठा रहा है कि इसे तुरंत लागू क्यों नहीं किया जा रहा।
राजनीतिक असर क्या होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक के लागू होने से देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीतियों और निर्णयों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा बन सकता है।
आज संसद में होने वाली वोटिंग सिर्फ एक विधेयक का फैसला नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक संरचना में एक बड़े बदलाव की दिशा तय करेगी। सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अधूरा और राजनीतिक निर्णय मान रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज की वोटिंग का नतीजा क्या निकलता है और इसका देश की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।








