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पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को विधानसभा में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम श्रद्धांजलि

शिबू सोरेन को अंतिम श्रद्धांजलि

रांची: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता और संघर्ष के प्रतीक पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन को अंतिम श्रद्धांजलि आज झारखंड विधानसभा परिसर में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम दर्शनार्थ रखा गया।

इस अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, केंद्र एवं राज्य सरकार के मंत्रीगण, विधायकगण, पूर्व सांसदगण, पूर्व विधायकगण तथा विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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विधानसभा परिसर में उमड़ा जनसैलाब
झारखंड विधानसभा परिसर में जैसे ही दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर लाया गया, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। विधानसभा परिसर में श्रद्धांजलि सभा का माहौल गमगीन रहा, और हर कोई अपने प्रिय नेता को अंतिम बार निहारने उमड़ पड़ा।

नेताओं की श्रद्धांजलि

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राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा,

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“दिशोम गुरु जी ने झारखंड राज्य निर्माण के लिए जो योगदान दिया, वह अमिट और अनुकरणीय है। उनका संघर्ष सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।”

विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने उन्हें जन आंदोलन का पर्याय बताते हुए कहा कि,

“उन्होंने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और जनता के लिए अंतिम समय तक समर्पित रहे।”

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गमगीन स्वर में कहा,

“हमने केवल पिता नहीं, झारखंड की आत्मा को खो दिया है। उनके अधूरे सपनों को पूरा करना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

सामाजिक-राजनीतिक जीवन का अवसान
दिशोम गुरु शिबू सोरेन न केवल झामुमो के संस्थापक थे बल्कि उन्होंने आदिवासी अधिकारों, जंगल-जमीन और स्वाभिमान की लड़ाई को राजनीतिक पहचान दिलाई। उनका निधन एक राजनीतिक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

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अंतिम यात्रा की तैयारी
विधानसभा में श्रद्धांजलि अर्पण के पश्चात पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान के साथ समाधि स्थल की ओर रवाना किया गया, जहां पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया जाएगा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा, पूरे राज्य और देश ने आज एक युगपुरुष को खो दिया। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की स्मृति और संघर्ष चिरकाल तक जीवित रहेंगे।

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