सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव!
15 लाख स्कूलों को मिलेगा ₹30 लाख तक का बजट, 75% अभिभावकों वाली कमेटी करेगी निगरानी
मुनादी लाइव : केंद्र सरकार देश के सरकारी स्कूलों में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार अब देशभर के करीब 15 लाख सरकारी स्कूलों को निर्माण, मरम्मत और विकास कार्यों के लिए 30 लाख रुपये तक का बजट देने जा रही है। इस योजना की सबसे खास बात यह होगी कि हर स्कूल में एक विशेष कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें 75 प्रतिशत सदस्य छात्रों के माता-पिता होंगे। सरकार का मानना है कि इससे स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।
हर स्कूल की होगी अपनी कमेटी
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक सरकारी स्कूल में एक स्कूल प्रबंधन एवं विकास समिति गठित की जाएगी। इस कमेटी में अभिभावकों की भागीदारी सबसे ज्यादा होगी। कुल सदस्यों में 75 प्रतिशत हिस्सेदारी माता-पिता की रहेगी। इसके अलावा शिक्षकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी समिति में शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि स्कूलों से जुड़े फैसलों में सीधे अभिभावकों की भूमिका बढ़ाई जाए।
निर्माण और विकास पर खर्च होगा पैसा
स्कूलों को मिलने वाली राशि का उपयोग कई महत्वपूर्ण कार्यों में किया जा सकेगा। इसमें स्कूल भवन की मरम्मत, नए क्लासरूम का निर्माण, शौचालय, पेयजल, खेल मैदान, डिजिटल क्लासरूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास शामिल होगा। सरकार चाहती है कि ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में भी बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाए।
अभिभावकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था में अभिभावकों को केवल दर्शक नहीं बल्कि फैसले लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा। स्कूलों में विकास कार्यों की निगरानी, बजट उपयोग और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े मुद्दों पर कमेटी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्कूलों में जवाबदेही बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।
डिजिटल और आधुनिक स्कूलों पर जोर
सरकार की योजना सिर्फ भवन निर्माण तक सीमित नहीं है। नई नीति के तहत स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, डिजिटल लर्निंग और आधुनिक शिक्षा सुविधाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इसके जरिए सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के मुकाबले बेहतर और प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश की जा रही है।
शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार की तैयारी
केंद्र सरकार की यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। सरकार का दावा है कि इस मॉडल से स्कूलों में सामुदायिक भागीदारी बढ़ेगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। यदि यह योजना सफल होती है तो आने वाले वर्षों में सरकारी स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।





