हरमू स्थित ब्रह्माकुमारी केंद्र में आध्यात्मिक होली उत्सव, दिया पवित्रता और आत्म-परिवर्तन का संदेश
रांची: राजधानी रांची के हरमू रोड स्थित चौधरी बगान में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र में होली के पावन अवसर पर एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया और होली के आध्यात्मिक महत्व पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड प्रदेश मारवाड़ी सम्मेलन के महामंत्री विनोद जैन ने कहा कि होली “बीती सो बीती” का संदेश देती है। यह पर्व क्षमा, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की स्मृति में रहकर आत्मा को शुद्ध और सुखमय बनाना ही सच्ची होली है।
पतंजलि के नगर प्रभारी वीरेंद्र कुमार ने कहा कि होली का वास्तविक अर्थ है स्वयं को दिव्य गुणों के रंगों में रंगना। उन्होंने बताया कि शांति, प्रेम, पवित्रता और आनंद के रंग ही स्थायी होते हैं, जबकि बाहरी रंग कुछ समय बाद फीके पड़ जाते हैं।
अधिवक्ता कौशल राजगढ़िया ने होली को पवित्रता का पर्व बताते हुए कहा कि विकारों पर विजय प्राप्त कर ही सतयुग की स्थापना संभव है। परमात्मा हमें हमारे मूल संस्कारों की याद दिलाते हैं, जिनमें पवित्रता सर्वोपरि है।
दंत चिकित्सक डॉ. आशीष भगत ने कहा कि भारतीय त्योहार केवल उत्सव नहीं बल्कि जीवन यात्रा से जुड़े आध्यात्मिक परिवर्तन की याद दिलाते हैं। समाजसेवी अमित अग्रवाल ने कहा कि पवित्रता का अर्थ केवल ब्रह्मचर्य नहीं बल्कि मन, कर्म और वचन की शुद्धता है।
एसबीआई के सेवानिवृत्त एजीएम सुनील गुप्ता ने होलिका दहन को आंतरिक विकारों—काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार—को समाप्त करने का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय ज्ञान की अग्नि में नकारात्मक संस्कारों को जलाना ही सच्ची होली है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र संचालिका निर्मला बहन ने कहा कि परमात्मा के संग का रंग ही अविनाशी रंग है। उन्होंने बताया कि ज्ञान, गुण और शक्तियों के रंग आत्मा को स्थायी रूप से पवित्र बनाते हैं। योगाग्नि में पुराने संस्कारों को दग्ध कर जीवन को दिव्य बनाने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में मनमोहन मोहता, मुकेश जाजोदिया, अरविंद कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। अंत में गाइडेड मेडिटेशन के माध्यम से राजयोग का अभ्यास कराया गया तथा कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
यह आयोजन केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि आत्म-चिंतन, संस्कार परिवर्तन और आध्यात्मिक जागरण का संदेश लेकर आया, जिसने उपस्थित जनसमूह को गहराई से प्रभावित किया।








