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जादूगोड़ा यूरेनियम खनन का मुद्दा राष्ट्रपति भवन पहुंचा

Jadugoda Uranium Mining

स्वास्थ्य, पर्यावरण और विस्थापन के आरोपों पर झारखंड सरकार से मांगी गई रिपोर्ट

रांची/जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा स्थित यूरेनियम खनन क्षेत्र से जुड़े स्वास्थ्य, पर्यावरण और विस्थापन के गंभीर मुद्दे अब राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गए हैं। रामगढ़ निवासी और सरकारी वकील संजीव कुमार अंबष्ठा द्वारा राष्ट्रपति को भेजी गई याचिका पर राष्ट्रपति सचिवालय ने संज्ञान लिया है। इसके बाद झारखंड सरकार से पूरे मामले में कार्रवाई रिपोर्ट मांगी गई है।राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से अवर सचिव लक्ष्मी महारा भूषणम ने झारखंड के मुख्य सचिव को ई-मेल भेजकर मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने और रिपोर्ट याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि जादूगोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से हो रहे यूरेनियम खनन का असर स्थानीय आदिवासी समुदायों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसमें कैंसर, जन्मजात विकृति, त्वचा रोग, बांझपन और श्वसन संबंधी बीमारियों के बढ़ते मामलों का उल्लेख किया गया है। साथ ही भूजल, कृषि भूमि और फसलों के प्रदूषित होने की आशंका भी जताई गई है।

UCIL की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
याचिका में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की खदानों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि स्थानीय श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और विकिरण से बचाव से जुड़ी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।

विस्थापन और पुनर्वास की मांग
याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति से पूरे क्षेत्र की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा व्यापक स्वास्थ्य सर्वेक्षण, मुफ्त चिकित्सा सुविधा, पानी और भूमि की वैज्ञानिक जांच तथा विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की भी मांग उठाई गई है। याचिका में आदिवासी समुदायों के लिए विशेष कल्याण पैकेज लागू करने की अपील भी की गई है।

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अब सरकार की कार्रवाई पर टिकी नजरें
राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा रिपोर्ट मांगे जाने के बाद अब स्थानीय लोगों की नजरें झारखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर टिक गई हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जादूगोड़ा में वर्षों से स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं, लेकिन अब पहली बार मामला राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा है।

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फिर चर्चा में आया जादूगोड़ा
इस घटनाक्रम के बाद जादूगोड़ा में यूरेनियम खनन से जुड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक और स्वतंत्र जांच होती है, तो क्षेत्र की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

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