चुनाव आयोग का एलान: 12 राज्यों में चलेगा SIR का दूसरा चरण
नई दिल्ली: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अब इसका दूसरा फेज शुरू किया जा रहा है, जिसके तहत 12 राज्यों में यह अभियान चलाया जाएगा।
बिहार में सफल रहा पहला चरण
सीईसी ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में SIR का पहला चरण बेहद सफल रहा। उन्होंने बताया कि बिहार के लोगों ने इस प्रक्रिया पर पूरा भरोसा जताया है, और राज्य में मतदाता सूची को सटीक बनाने में प्रशासन और जनता दोनों ने मिलकर महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
“SIR का उद्देश्य स्पष्ट है — योग्य मतदाताओं को जोड़ा जाए और अयोग्य मतदाताओं को सूची से हटाया जाए,”
— ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त
SIR क्यों है जरूरी?
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि भारत में पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण 21 साल पहले किया गया था।
उन्होंने बताया कि अब जनसंख्या, आवागमन और सामाजिक गतिशीलता में तेजी से बदलाव आया है, इसलिए वोटर लिस्ट को अद्यतन और पारदर्शी बनाना बेहद आवश्यक है। सीईसी ने कहा —
“चुनावों से पहले SIR किया जाना सबसे जरूरी प्रक्रिया है। इससे लोकतंत्र की नींव और मजबूत होती है।”
हर घर पहुंचेगा बीएलओ
इस विशेष अभियान के तहत हर घर पर ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) तीन बार जाएंगे। वे मतदाताओं से सीधे संपर्क कर उनके नाम, पते, उम्र और पात्रता की जानकारी जुटाएंगे। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे।
12 राज्यों में चलेगा दूसरा चरण
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR का दूसरा फेज देश के 12 राज्यों में लागू किया जाएगा।
हालांकि, आयोग ने राज्यों के नामों की औपचारिक सूची जल्द जारी करने की बात कही है। इस प्रक्रिया में राज्य निर्वाचन आयोग, स्थानीय प्रशासन, BLOs और पर्यवेक्षकों की सक्रिय भूमिका होगी।
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले तैयारी
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी का भी हिस्सा है। इन चुनावों में असम, तमिलनाडु, पुद्दुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं। आयोग का लक्ष्य है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिरहित और अद्यतन हो।
पारदर्शिता और विश्वास की दिशा में बड़ा कदम
चुनाव आयोग का यह कदम भारत में चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और समावेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक नागरिक की लोकतांत्रिक भागीदारी सही और सटीक तरीके से दर्ज हो।






