LPG का अजीब गणित: 5 किलो सिलेंडर महंगा, 14 किलो सस्ता क्यों?
100 रुपये का फर्क, लेकिन गैस तीन गुना—समझिए पूरा खेल
नई दिल्ली: देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को लेकर इन दिनों एक अजीब स्थिति देखने को मिल रही है। 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर और 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में बहुत कम अंतर है, जबकि गैस की मात्रा में तीन गुना फर्क है। यही वजह है कि लोग इस मूल्य निर्धारण को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
कीमत में मामूली अंतर, मात्रा में बड़ा फर्क
अगर कीमत की बात करें तो 5 किलो वाला छोटू सिलेंडर करीब 800 रुपये से ज्यादा में मिल रहा है, जबकि 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर करीब 900 रुपये के आसपास उपलब्ध है। यानी सिर्फ लगभग 100 रुपये ज्यादा देकर उपभोक्ता तीन गुना अधिक गैस प्राप्त कर सकता है। यह अंतर पहली नजर में ही लोगों को हैरान कर देता है और यही वजह है कि इसे लेकर बहस तेज हो गई है।
प्रति किलो गैस का असली गणित
जब इस पूरे मामले को प्रति किलो कीमत के आधार पर देखा जाता है, तो तस्वीर और स्पष्ट हो जाती है। 14.2 किलो वाले सिलेंडर में प्रति किलो गैस की कीमत करीब 60 से 65 रुपये बैठती है, जबकि 5 किलो वाले सिलेंडर में यह कीमत 150 से 160 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसका मतलब यह है कि छोटा सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता प्रति किलो गैस के लिए लगभग तीन गुना ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।
हालिया बढ़ोतरी ने बढ़ाया अंतर
1 मई को गैस सिलेंडर की कीमतों में हुए बदलाव ने इस अंतर को और बढ़ा दिया है। 5 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में 261 रुपये की बढ़ोतरी हुई, जिससे इसकी कीमत 800 रुपये के पार पहुंच गई। वहीं कमर्शियल सिलेंडर के दाम में भी लगभग 1000 रुपये की वृद्धि हुई। हालांकि घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया, जिससे आम घरों को थोड़ी राहत मिली।
किन पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर
छोटे सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर या अस्थायी जीवनशैली वाले हैं। इनमें छात्र, प्रवासी मजदूर, किराए के मकानों में रहने वाले लोग और छोटे दुकानदार शामिल हैं। यह सिलेंडर हल्का और आसानी से उपलब्ध होता है, इसलिए इन वर्गों में इसकी मांग ज्यादा होती है।
LPG की कीमत तय कैसे होती है
भारत में LPG सिलेंडर की कीमतें तेल कंपनियां एक विशेष फॉर्मूले के आधार पर तय करती हैं, जिसे इंपोर्ट पैरिटी प्राइस (IPP) कहा जाता है। इस फॉर्मूले में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और ट्रांसपोर्ट व वितरण लागत जैसे कई कारकों को शामिल किया जाता है। जब कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है या रुपया कमजोर होता है, तो LPG के दाम भी बढ़ जाते हैं।
छोटा सिलेंडर महंगा क्यों पड़ता है
छोटे सिलेंडर की अधिक कीमत के पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इसकी लॉजिस्टिक और डिस्ट्रीब्यूशन लागत अधिक होती है। इसके अलावा इस पर सब्सिडी का लाभ सीमित होता है। कई बार इसका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है, जिससे इसकी कीमत घरेलू सिलेंडर की तुलना में अधिक रखी जाती है।
आगे क्या हो सकता है असर
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का असर आगे भी LPG कीमतों पर पड़ता रहेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिरता आती है, तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
LPG सिलेंडर की कीमतों का यह अंतर आम लोगों के लिए भले ही उलझन भरा हो, लेकिन इसके पीछे आर्थिक और व्यावसायिक कारण मौजूद हैं। फिर भी यह साफ है कि छोटा सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले लोगों पर महंगाई का असर ज्यादा पड़ रहा है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में सरकार और तेल कंपनियां इस असंतुलन को कम करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।






