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जमशेदपुर में पिछड़ा वर्ग आयोग की समीक्षा बैठक: आरक्षण निर्धारण, योजनाओं की स्थिति और सुधारों पर गंभीर विमर्श

जमशेदपुर में ओबीसी आरक्षण

ट्रिपल टेस्ट के आधार पर नगर निकाय आरक्षण की तैयारी, आयोग ने विभागीय जवाबदेही तय करने पर दिया जोर

जमशेदपुर: झारखंड में नगर निकायों में पिछड़े वर्गों को जमशेदपुर में ओबीसी आरक्षण देने की प्रक्रिया को लेकर अब सरकार और आयोग की सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है। इसी क्रम में मंगलवार को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष जानकी प्रसाद यादव की अध्यक्षता में पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक परिसदन सभागार में आयोजित की गई।

बैठक का उद्देश्य स्पष्ट था — नगर निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार अपनाए जा रहे ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया के तहत संपन्न “डोर-टू-डोर सर्वे” की समीक्षा। इसके साथ ही आयोग ने पिछड़े वर्गों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की स्थिति, प्रभाव और सुधार की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

आयोग ने सभी विभागों से मांगा अद्यतन प्रतिवेदन
बैठक में आयोग के सदस्यों – नन्दकिशोर मेहता, लक्ष्मण यादव और नरेश वर्मा ने भी भाग लिया। आयोग ने जिला के सभी संबंधित विभागों से ट्रिपल टेस्ट सर्वे से जुड़े अद्यतन प्रतिवेदन की मांग की। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जाति, आय, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसी मूलभूत सेवाओं से संबंधित लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन हो।

आयोग ने कहा कि पिछड़े वर्गों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक स्थिति की समीक्षा ही नहीं, बल्कि उसके समाधान की दिशा में ठोस प्रयास होने चाहिए। जनसंख्या के अनुसार योजनाओं के लाभ वास्तविक ज़रूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए सभी स्तर पर जवाबदेही तय हो।

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प्राकृतिक आपदा और आकस्मिक मौतों पर सहायता के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, सर्पदंश, बिजली गिरने जैसी घटनाओं में मृत अथवा प्रभावित परिवारों को मिलने वाली सरकारी सहायता पर भी विमर्श हुआ। आयोग ने प्रशासन को निर्देश दिया कि पीड़ित परिवारों तक मुआवजा और अन्य सहायता योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुंचे।

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वहीं हाथी प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को हुई फसल क्षति के लिए भी मुआवजे की व्यवस्था और पुनर्वास प्रयासों की स्थिति की जानकारी ली गई।

शिक्षा और स्वरोजगार योजनाओं पर विशेष फोकस
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने शिक्षा विभाग से कहा कि हर योग्य छात्र को प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति और साइकिल योजना का लाभ मिले, यह सुनिश्चित किया जाए। साथ ही RTE के तहत निजी विद्यालयों में बीपीएल परिवारों के बच्चों का 25% नामांकन हो, यह शिक्षा अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

आयोग ने आवासीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति की जानकारी ली और यह सुनिश्चित करने को कहा कि भोजन, आधारभूत ढांचा और पढ़ाई से जुड़ी सामग्री समय पर विद्यार्थियों को मिले।

स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण पर आयोग का विशेष ध्यान रहा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा योजनाओं का बेहतर संचालन हो, अधिकतम लोगों को रोजगार और कौशल प्रशिक्षण मिले। महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से वित्तीय सहयोग दिया जाए।

कृषि, मत्स्य और उद्यमिता को मिला नया बल
बैठक के दौरान आयोग ने कृषि विभाग से कहा कि किसानों को उचित दर पर बीज, खाद, और फलदार पौधे उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए पंचायत स्तर पर समितियां गठित करने, मत्स्य पालकों को मार्केट लिंकेज और ऋण जैसी सुविधाएं देने का निर्देश दिया गया।

आयोग ने जोर दिया कि सरकार की योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उसके धरातलीय क्रियान्वयन पर निगरानी हो।

योजनाओं में समावेशिता और पारदर्शिता पर फोकस
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने स्पष्ट किया कि नगर निकायों में आरक्षण केवल राजनीतिक या सांख्यिकीय गणना नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय की एक बुनियादी मांग है। इसके लिए ट्रिपल टेस्ट के तहत पारदर्शी और निष्पक्ष सर्वे, योजनाओं की निष्पादन क्षमता, और सभी विभागों की सक्रियता जरूरी है।

आयोग की बैठक में शामिल हुए जिला अधिकारीगण ने सभी निर्देशों पर शीघ्र अमल का आश्वासन दिया।

आगामी दिनों में आयोग अन्य जिलों में भी इसी तरह की समीक्षा बैठकें करेगा ताकि ओबीसी समुदाय के लिए योजनाओं की प्रभावशीलता और सामाजिक न्याय की दिशा में राज्य सरकार और प्रशासन की प्रतिबद्धता को मजबूती दी जा सके।

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