पाकुड़ जिले ने बनाया राष्ट्रीय कीर्तिमान: वित्तीय समावेशन और कौशल विकास में मिला देश में दूसरा स्थान

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पाकुड़: पाकुड़ जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नया इतिहास रच दिया है। नीति आयोग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जिले ने फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) और स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) श्रेणी में देशभर में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि न सिर्फ जिले के लिए बल्कि पूरे झारखंड राज्य के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है।

मसूरी में हुआ सम्मान समारोह
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए उपायुक्त मनीष कुमार को गुरुवार को लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार जिले में वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और नवाचार के क्षेत्र में किए गए ठोस और प्रभावी कार्यों को मान्यता देने के लिए प्रदान किया गया।

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टीमवर्क और नवाचार का परिणाम
सम्मान प्राप्त करने के बाद उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा, “यह सफलता केवल जिला प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे पाकुड़ जिले की है। टीम, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों के कारण ही यह संभव हो सका है। सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार और टीमवर्क से उत्कृष्ट परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि इस उपलब्धि से जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल बढ़ा है और यह भविष्य में और बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देगा।

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वित्तीय समावेशन और कौशल विकास में उल्लेखनीय कार्य
पाकुड़ जिले में वित्तीय समावेशन के तहत बैंकिंग सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने, जनधन खातों की संख्या में बढ़ोतरी करने, बीमा और पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों को जोड़ने में उत्कृष्ट कार्य किया गया।

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कौशल विकास के क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षण देने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के लिए कई प्रभावी कार्यक्रम चलाए गए। इन पहलों ने जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राज्य के लिए बना प्रेरणास्त्रोत
पाकुड़ की इस राष्ट्रीय उपलब्धि ने राज्य के अन्य जिलों के लिए एक आदर्श मिसाल पेश की है। नीति आयोग द्वारा निर्धारित कई सूचकांकों पर जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है, जिससे झारखंड का नाम राष्ट्रीय मंच पर और अधिक मजबूत हुआ है।

जिले के नागरिकों में भी इस उपलब्धि को लेकर गर्व की भावना है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस सफलता को और ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए योजनाओं को और प्रभावी तरीके से लागू किया जाएगा।

पाकुड़ जिले की यह उपलब्धि दिखाती है कि संसाधन सीमित होने के बावजूद यदि योजनाओं को सही रणनीति, नवाचार और जनसहभागिता के साथ लागू किया जाए तो राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। वित्तीय समावेशन और कौशल विकास में दूसरा स्थान पाना पूरे झारखंड के लिए गौरव की बात है।

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