सारंडा जंगल में नक्सली हमला, CRPF इंस्पेक्टर गंभीर रूप से घायल

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नक्सलियों ने आईईडी ब्लास्ट कर सुरक्षा बलों की टीम को बनाया निशाना, पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी

चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के घने सारंडा जंगल में शुक्रवार शाम नक्सलियों ने एक बार फिर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नक्सल विरोधी अभियान के दौरान उन्होंने दो अलग-अलग स्थानों पर विस्फोटक हमले किए, जिससे सुरक्षा बलों में अफरा-तफरी मच गई। इन हमलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 60वीं बटालियन के इंस्पेक्टर केके मिश्रा गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना जराईकेला थाना क्षेत्र के सामठा गांव के बाबूडेरा इलाके की है, जहां जिला पुलिस, सीआरपीएफ और अन्य बल संयुक्त रूप से नक्सल विरोधी अभियान चला रहे थे। जानकारी के मुताबिक, नक्सलियों ने पहले से घात लगाकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया और आईईडी ब्लास्ट कर हमला कर दिया। धमाका इतना तेज था कि आसपास का इलाका थर्रा उठा और धुएं का गुबार फैल गया।

घायल इंस्पेक्टर को मौके से निकालकर पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें बेहतर इलाज के लिए राउरकेला स्थित अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। सूत्रों के अनुसार, इंस्पेक्टर मिश्रा की हालत अब स्थिर बताई जा रही है।

एक और धमाके में उड़ाई पुलिया, इलाके में फैली दहशत
पहले हमले के कुछ घंटे बाद नक्सलियों ने दूसरी वारदात को अंजाम दिया। इस बार उन्होंने एक पुलिया को विस्फोटक से उड़ा दिया, जिससे इलाके में यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। आसपास के ग्रामीणों में भय और दहशत का माहौल फैल गया।

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पुलिस अधीक्षक अमित रेनु ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि नक्सली हमले के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है। उन्होंने कहा, “सुरक्षा बल अभियान पर थे तभी यह हमला हुआ। घायल अधिकारी का इलाज जारी है और स्थिति नियंत्रण में है।”

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घटना के बाद पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। पुलिस और सीआरपीएफ की कई टीमें जंगल के भीतर तलाशी अभियान चला रही हैं ताकि नक्सलियों के ठिकानों का पता लगाया जा सके।

सारंडा जंगल बना फिर नक्सलियों का ठिकाना
सारंडा जंगल लंबे समय से नक्सलियों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई से नक्सली गतिविधियों पर लगाम लगी थी, लेकिन हाल की घटनाएं संकेत दे रही हैं कि नक्सली फिर से सक्रिय हो रहे हैं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि नक्सली भाकपा (माओवादी) संगठन के सदस्य हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में “प्रतिशोध सप्ताह” मनाने का आह्वान किया है। 8 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक यह अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत नक्सली सुरक्षाबलों पर हमले की कोशिश कर रहे हैं।

हालिया आत्मसमर्पण और नई रणनीति की आशंका
गौरतलब है कि हाल ही में कई नक्सलियों ने डीजीपी अनुराग गुप्ता के समक्ष आत्मसमर्पण किया था और हिंसा छोड़ने की बात कही थी। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नक्सल संगठन के अंदरूनी गुटों में फूट पड़ने के बावजूद कुछ कट्टर उग्रवादी गुट अब भी सक्रिय हैं, जो जंगल के दुर्गम इलाकों में छिपकर हमले की साजिश रच रहे हैं।

सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह हमला उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है जिसमें नक्सली सुरक्षाबलों की गतिविधियों को बाधित कर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

सुरक्षा बलों ने बढ़ाई सतर्कता
हमले के बाद पश्चिमी सिंहभूम, चाईबासा और सरायकेला-खरसावां जिलों की सीमाओं पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। पुलिस बलों को अतिरिक्त गश्ती के निर्देश दिए गए हैं। ड्रोन सर्विलांस और स्निफर डॉग्स की मदद से इलाके की घेराबंदी कर तलाशी जारी है। स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

सारंडा जंगल में हुए दोहरे विस्फोट ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि नक्सली खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। हालांकि सुरक्षाबलों की सक्रियता और लगातार चल रहे अभियानों से स्थिति पर नियंत्रण है, लेकिन इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को नई चुनौती दे दी है।

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