हिंडाल्को मुरी वर्क्स लिमिटेड के विरुद्ध एकदिवसीय अनशन
स्थानीय युवाओं, विस्थापितों और पर्यावरण न्याय की मांग उठाने जा रहे हैं राजू कुमार महतो
मुरी (रांची): झारखंड की औद्योगिक धरती पर फिर एक बार स्थानीय अधिकार और न्याय की आवाज बुलंद होने जा रही है।
राजू कुमार महतो, लगाम गांव निवासी और हिंडाल्को मुरी वर्क्स लिमिटेड के एक कर्मी, ने घोषणा की है कि वे 30 अक्टूबर 2025 को हिंडाल्को गेट के सामने सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक एकदिवसीय सांकेतिक अनशन पर बैठेंगे। यह अनशन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और इसका उद्देश्य है —
स्थानीय युवाओं, महिलाओं और विस्थापित परिवारों को रोजगार, शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण और पारदर्शिता दिलाना।

“लोकल के बिना विकास नहीं” — 75% स्थानीय रोजगार की मांग
राजू कुमार महतो ने स्पष्ट कहा कि हिंडाल्को जैसी बड़ी कंपनी यदि स्थानीय समुदाय को नजरअंदाज करती है, तो यह सामाजिक न्याय के साथ अन्याय है। उनकी पहली और प्रमुख मांग है —कंपनी में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार दिया जाए। साथ ही विस्थापितों के आश्रितों को पुनः नियुक्ति दी जाए और महिलाओं को कम से कम 20% आरक्षण के तहत रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
आईटीआई अप्रेंटिस और युवाओं की प्राथमिकता
अनशन की प्रमुख मांगों में से एक है —
विस्थापित क्षेत्र के युवाओं को आईटीआई अप्रेंटिस कार्यक्रमों में प्राथमिकता दी जाए। राजू महतो ने कहा कि जब तक विस्थापित क्षेत्र के युवाओं की सीटें भर नहीं जातीं, बाहर के युवाओं को शामिल न किया जाए।
शिक्षा और खेल विकास की भी मांग
उन्होंने कहा कि हिंडाल्को को अपनी CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) नीति में शिक्षा और खेल को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। अनशन के बिंदुओं में शामिल है —
- विस्थापित क्षेत्र के बच्चों को फ्री एजुकेशन
- आदित्य बिरला +2 विद्यालय में स्थानीय शिक्षकों की नियुक्ति
- स्पोर्ट्स अकादमी की स्थापना, ताकि स्थानीय प्रतिभाओं को मंच मिल सके
पर्यावरण और प्रदूषण से सुरक्षा
राजू महतो ने कहा कि हिंडाल्को मुरी वर्क्स के कारण रेड मड पोंड और वायु प्रदूषण स्थानीय जीवन के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। उन्होंने मांग रखी कि —
- रेड मड पोंड की सुरक्षा दीवार को पुनर्निर्मित किया जाए
- वर्ष 2019 की दुर्घटना की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो
- प्रदूषित क्षेत्र में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया जाए
- फैक्ट्री मोड़, मुरी में पब्लिक प्रदूषण मॉनिटरिंग यंत्र स्थापित किए जाएं
रेड मड तालाब दुर्घटना से प्रभावितों के लिए न्याय
2019 की दुर्घटना में जिनकी जमीनें बंजर हुईं या क्षतिग्रस्त हुईं, उन्हें नौकरी और वार्षिक मुआवजा देने की मांग भी अनशन के एजेंडे में शामिल है।
राजू महतो ने कहा —
“रेड मड तालाब के टूटने से जिनकी जमीन और आजीविका दोनों छिन गई, उन्हें न्याय दिलाना इस आंदोलन की नैतिक जिम्मेदारी है।”
CSR में पारदर्शिता और जन-सहभागिता की मांग
राजू महतो ने हिंडाल्को प्रबंधन से आग्रह किया है कि CSR खर्च की पूरी जानकारी जनता के बीच पारदर्शी तरीके से साझा की जाए। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि कंपनी हर माह एक CSR पत्रिका जारी करे, जिसमें स्थानीय स्तर पर किए गए कार्यों की जानकारी जनता को मिले।
ठेकेदारी में पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी
उन्होंने कहा कि कंपनी की परचेज और ठेकेदारी प्रणाली में कमीशनखोरी और मनमानी चरम पर है।
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी ठेकेदारों और दबंगों का कब्जा बना हुआ है।
उन्होंने कहा —
“ठेकेदारी में स्थानीय युवाओं को मौका दें, क्योंकि यही असली हितधारक हैं। विकास वहीं टिकाऊ होगा, जहाँ स्थानीय लोग जुड़े रहेंगे।”
स्वर्णरेखा नदी की रक्षा और अवैध कब्जा हटाने की मांग
अनशन की एक और अहम मांग है कि हिंडाल्को मुरी वर्क्स द्वारा स्वर्णरेखा नदी पर अवैध कब्जा और प्रदूषण को रोका जाए।
उन्होंने कहा कि नदी का दोहन रुकना चाहिए और प्राकृतिक संतुलन बहाल करना कंपनी की नैतिक जिम्मेदारी है।
“अगर नहीं सुनी गई बात, तो होगा बड़ा आंदोलन”
राजू कुमार महतो ने साफ कहा कि यह अनशन सांकेतिक है, पर अगर प्रबंधन ने स्थानीय हितों की अनदेखी जारी रखी तो
“आने वाले दिनों में यह संघर्ष एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।”
उन्होंने अपील की है कि प्रशासन और कंपनी प्रबंधन इस मुद्दे को गंभीरता से लें और
पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवाद के माध्यम से समाधान निकालें।
शांतिपूर्ण आंदोलन, न्यायपूर्ण उद्देश्य
राजू महतो ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन अहिंसक और शांतिपूर्ण रहेगा।
स्थानीय युवा, महिलाएँ और विस्थापित परिवार इस अनशन में उनका समर्थन करेंगे।
उनका कहना है —
“हम सिर्फ हक मांग रहे हैं, टकराव नहीं। अगर हिंडाल्को चाहे, तो यह संघर्ष समाधान का अवसर बन सकता है।”
यह अनशन केवल एक कंपनी के खिलाफ नहीं, बल्कि स्थानीय हक, रोजगार और पर्यावरणीय न्याय की सामूहिक पुकार है।
अगर हिंडाल्को जैसे उद्योग अपनी नीतियों में स्थानीय हितों को प्राथमिकता दें, तो झारखंड का विकास अधिक संतुलित और टिकाऊ बनेगा।








