झारखंड पुलिस की बड़ी कामयाबी: झुमरा-पारसनाथ ऑपरेशन को केंद्रीय सम्मान
झारखंड : झारखंड पुलिस के साहस, रणनीति और नक्सल विरोधी अभियानों में मिली ऐतिहासिक सफलता को अब देश स्तर पर भी मान्यता मिल गई है। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने झुमरा और पारसनाथ इलाके में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए उस ऐतिहासिक ऑपरेशन के लिए कई पुलिस अफसरों और जवानों को “गृह मंत्री दक्षता पदक” से सम्मानित किया है, जिसने झारखंड में नक्सलवाद की रीढ़ तोड़ दी थी।
साल 2025 झारखंड पुलिस के लिए बेहद सफल वर्ष रहा। झुमरा और पारसनाथ जैसी पहाड़ियों में, जहां कभी नक्सलियों का शासन चलता था, अब तिरंगा लहरा रहा है। इसी ऑपरेशन को अंजाम देने वाले अफसरों में तत्कालीन आईजी अभियान अमोल वेणुकांत होमकर, तत्कालीन बोकारो आईजी माइकल राज, डीआईजी एसटीएफ इंद्रजीत महथा, तत्कालीन बोकारो एसपी मनोज स्वर्गीयरी, और कई अन्य अधिकारियों को यह बड़ा सम्मान मिला है।
नक्सलियों का गढ़ बना था झुमरा और पारसनाथ
एक समय झुमरा और पारसनाथ का इलाका नक्सलियों के लिए सबसे सुरक्षित अड्डा माना जाता था। यहां से वे पूरे गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग इलाके में अपना नेटवर्क चलाते थे। लेकिन साल 2025 की शुरुआत में, झारखंड पुलिस ने इन इलाकों को नक्सल मुक्त करने की ठान ली। आईजी अभियान अमोल होमकर के नेतृत्व में कई महीनों तक चली गुप्त तैयारियों और माओवादी दस्तों की सटीक जानकारी के बाद जनवरी से अप्रैल 2025 तक चला यह अभियान झारखंड पुलिस के इतिहास का सबसे बड़ा नक्सल उन्मूलन ऑपरेशन बन गया।
इस दौरान कई खूंखार नक्सली मारे गए, जिनमें एक करोड़ का इनामी माओवादी विवेक उर्फ प्रयाग मांझी भी शामिल था। इसी ऑपरेशन में 15 लाख का इनामी रणविजय महतो गिरफ्तार किया गया और नक्सलियों के कई ठिकाने ध्वस्त किए गए।
यह पहली बार था जब झारखंड में इतने बड़े पैमाने पर केंद्रीय और राज्य पुलिस बलों की संयुक्त कार्रवाई में एक साथ 8 नक्सली ढेर किए गए।
वॉर रूम से लेकर जंगल तक—दो महीने की गुप्त रणनीति
सूत्रों के अनुसार, इस अभियान की तैयारी में दो महीने का समय लगा। तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता, आईजी अभियान अमोल होमकर, सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह, और बोकारो रेंज की पुलिस टीम लगातार संपर्क में थीं। वॉर रूम में हर रात बैठकर यह प्लान तैयार किया जाता था कि माओवादी कहां ठहरते हैं, कब मूव करते हैं, कौन उन्हें रसद देता है, और किस समय हमला किया जा सकता है। पुलिस ने अपनी सटीक रणनीति और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जंगलों में छिपे माओवादियों को घेर लिया।
इस दौरान कई जगह मुठभेड़ें हुईं, जिनमें पुलिस ने भारी नुकसान पहुंचाया। कई हथियार, विस्फोटक और दस्तावेज बरामद किए गए। इस अभियान के बाद झुमरा और पारसनाथ क्षेत्र से नक्सलियों का नामोनिशान मिट गया।
अमोल होमकर बने नक्सलियों के लिए सबसे बड़ा खतरा
वर्तमान में आईजी रेल के पद पर कार्यरत अमोल वेणुकांत होमकर नक्सलियों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। नक्सलियों की आंतरिक रिपोर्ट्स में उनका नाम ‘सबसे खतरनाक पुलिस अफसर’ के रूप में दर्ज है। उनकी रणनीति ने न केवल झुमरा और पारसनाथ को मुक्त कराया, बल्कि पूरे झारखंड में नक्सली संगठन को कमजोर कर दिया।
पुलिस सूत्र बताते हैं कि ऑपरेशन की सफलता के बाद से माओवादियों की गतिविधियां लगभग खत्म हो गईं हैं। पारसनाथ, जो कभी भाकपा (माओवादी) का गढ़ माना जाता था, अब पूरी तरह से पुलिस नियंत्रण में है।
गृह मंत्रालय ने झारखंड पुलिस के जज़्बे को सराहा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस सफलता को “अभूतपूर्व” बताते हुए कहा कि झारखंड पुलिस ने न केवल नक्सल चुनौती को खत्म करने में सफलता पाई है, बल्कि देशभर की पुलिस फोर्स के लिए एक मिसाल पेश की है। इस अभियान में शामिल 14 अफसरों और जवानों को गृह मंत्री दक्षता पदक से सम्मानित किया गया है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन झारखंड पुलिस की प्रोफेशनल क्षमता और जमीनी समझ का अद्भुत उदाहरण है।
अब नक्सल मुक्त हो रहा है झारखंड
झुमरा और पारसनाथ में मिली सफलता के बाद झारखंड पुलिस का मनोबल काफी बढ़ा है। राज्य के कई अन्य इलाकों — लातेहार, चतरा, गढ़वा, और खूंटी में भी अब नक्सली गतिविधियों पर लगाम लग चुकी है। राज्य पुलिस के अनुसार, 2025 में नक्सल घटनाओं में पिछले वर्षों की तुलना में 70% से अधिक कमी आई है।
आईजी अभियान ने कहा था — “यह जीत सिर्फ एक ऑपरेशन की नहीं, बल्कि उन सभी जवानों की है जिन्होंने नक्सलमुक्त झारखंड का सपना देखा।”
झारखंड पुलिस का यह ऑपरेशन साबित करता है कि जब रणनीति, जज़्बा और नेतृत्व एक साथ हो, तो कोई चुनौती बड़ी नहीं रहती। झुमरा और पारसनाथ से नक्सलियों का सफाया केवल सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि एक नए झारखंड की कहानी है — जहाँ अब विकास, शांति और एकता की राह खुल चुकी है।








