विश्व मधुमेह दिवस 2025: बढ़ता खतरा, बदलती जीवनशैली और जागरूकता की ज़रूरत
जानें कैसे बच सकती हैं लाखों जानें
रांची: हर वर्ष की तरह इस बार भी 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस (World Diabetes Day 2025) मनाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिन मधुमेह जैसी तेजी से फैलने वाली बीमारी पर जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष का थीम है —
“Empowering Health: Know Your Risk, Act Early” यानी “जोखिम पहचानें, समय पर कदम उठाएं।”
भारत दुनिया का मधुमेह राजधानी बनता जा रहा है, और झारखंड सहित देश के कई राज्यों में डायबिटीज तेजी से फैल रही है। आंकड़े बताते हैं कि देश में लगभग 10 करोड़ लोग डायबिटीज के साथ जी रहे हैं, जबकि 13 करोड़ से अधिक प्री-डायबिटिक हैं। यानी बीमारी होने की कगार पर खड़े हैं। विशेषज्ञ इसे जीवनशैली, खान पान, तनाव और शारीरिक सक्रियता में कमी का परिणाम मानते हैं।
डायबिटीज: दुनिया और भारत दोनों के लिए चेतावनी का सायरन
WHO की रिपोर्ट के अनुसार:
- हर 6 सेकंड में 1 व्यक्ति की मौत डायबिटीज से संबंधित जटिलताओं की वजह से होती है।
- 2045 तक दुनिया में डायबिटीज के मामले 78 करोड़ तक पहुंच सकते हैं।
- भारत इस बीमारी का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट बनता जा रहा है।
झारखंड जैसे खनन, उद्योग और तेजी से शहरीकरण वाले राज्यों में पिछले 5 सालों में डायबिटीज के केसों में 25% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
झारखंड में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
चिकित्सकों के अनुसार राज्य में मधुमेह तेजी से फैलने के कुछ प्रमुख कारण हैं:
- अनियमित खान-पान – फास्ट फूड, पैक्ड फूड और तले हुए भोजन की आदतें।
- कम शारीरिक गतिविधि – लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप पर काम करना।
- तनाव – माइनिंग, उद्योग और शहरों में रफ वर्किंग ऑवर्स।
- आनुवंशिक वजहें – आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों में मेटाबॉलिक रिस्क का बढ़ना।
रांची, जमशेदपुर, धनबाद और बोकारो में मधुमेह रोगियों की संख्या ग्रामीण क्षेत्र की तुलना में लगभग दो गुना है।
डॉक्टरों की चेतावनी—“डायबिटीज अब उम्र नहीं देखता”
रांची RIMS के वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत कश्यप ने बताया— “पहले मधुमेह 50 के बाद की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब 25 से 35 वर्ष की उम्र वाले युवक और युवतियों में भी तेजी से बढ़ रही है। यह ‘लाइफस्टाइल डायबिटीज’ है।”
उन्होंने बताया कि महामारी के बाद युवा और बच्चे भी डायबिटीज से प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि:
- स्क्रीन टाइम बढ़ा है
- सुबह की दिनचर्या गड़बड़ है
- जंक फूड की लत बढ़ी है
देश भर में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम
विश्व मधुमेह दिवस पर पूरे भारत में इस साल भी कई जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं:
• मुफ्त हेल्थ चेकअप कैंप
सरकारी अस्पतालों व निजी संस्थाओं ने ब्लड शुगर टेस्ट, BMI चेकअप और डायबिटिक फूट केयर जांच की व्यवस्था की है।
• वॉकाथॉन और रन फॉर हेल्थ
रांची, हजारीबाग, पटना, दिल्ली और मुंबई सहित कई शहरों में “Walk Against Diabetes” रैलियां आयोजित की गईं।
• स्कूलों में विशेष जागरूकता सत्र
बच्चों में बढ़ती ‘जंक फूड के प्रति लत’ को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने विभिन्न स्कूलों में व्याख्यान आयोजित किए।
• डिजिटल हेल्थ अवेयरनेस
सोशल मीडिया पर #BlueCircle और #WorldDiabetesDay कैंपेन के ज़रिए लोगों को नियमित जांच कराने की अपील की जा रही है।
डायबिटीज के प्रमुख लक्षण—नजरअंदाज न करें
डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दिया जाए तो बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है:
- बार-बार पेशाब आना
- अत्यधिक प्यास लगना
- अचानक वजन घटना
- थकान और कमजोरी
- घाव का देर से भरना
- आंखों की रोशनी धुंधली होना
- पैरों में झनझनाहट
यदि ये लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए।
डायबिटीज कंट्रोल में रखने के 10 सरल उपाय
विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा की आदतों में सिर्फ 10 छोटे बदलाव डायबिटीज को काफी हद तक रोक सकते हैं:
- रोज 30–40 मिनट पैदल चलें
- दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पिएं
- सफेद चावल, चीनी और फास्ट फूड कम करें
- भोजन में सलाद और हरी सब्जी बढ़ाएं
- नींद पूरी लें, तनाव कम करें
- हर 6 महीने में ब्लड शुगर चेक कराएं
- धूम्रपान और शराब से दूरी
- नियमित योग और प्राणायाम
- पैक्ड और हाई कैलोरी फूड से बचें
- डॉक्टर की दवा समय पर लें
सरकार का फोकस: झारखंड में NCD क्लीनिक और जागरूकता मिशन
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में नॉन कम्युनिकेबल डिज़ीज़ (NCD) क्लीनिक सक्रिय किए हैं। राज्यभर में मुफ्त डायबिटीज स्क्रीनिंग भी चल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सहायक और ANM को डायबिटीज पहचानने और मरीजों को प्राथमिक सलाह देने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
डायबिटीज क्यों खतरनाक है?
अनियंत्रित मधुमेह इन गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है:
- किडनी फेल्योर
- हृदय रोग
- स्ट्रोक
- अंधापन
- डायबिटिक फुट और अंग कटना
- गर्भावस्था के दौरान उच्च खतरा
भारत में हर साल लाखों लोग इन जटिलताओं से प्रभावित होते हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
विश्व मधुमेह दिवस का मकसद सिर्फ बीमारी का डर दिखाना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करना है। सही समय पर सही कदम उठाकर यह बीमारी नियंत्रित की जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यही कहना है— “डायबिटीज जानलेवा नहीं, लेकिन लापरवाही जानलेवा जरूर है।”








