झारखंड शराब घोटाले में बड़ा मोड़, IAS फैज अक अहमद का 164 बयान दर्ज
Ranchi : झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले में बुधवार को एक अहम कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। उत्पाद विभाग के तत्कालीन आयुक्त और वर्तमान में रामगढ़ जिले के उपायुक्त (DC) पद पर कार्यरत वरिष्ठ IAS अधिकारी फैज अक अहमद का धारा 164 (183 BNSS एक्ट) के तहत बयान दर्ज किया गया है।
यह बयान ACB कोर्ट की अनुमति के बाद दर्ज हुआ, जिसे शराब घोटाले की जांच में एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
कोर्ट के आदेश पर मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान
बुधवार को ACB कोर्ट ने फैज अक अहमद का बयान दर्ज कराने के लिए एक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की। इसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष उनका 164 का बयान दर्ज किया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह बयान सीलबंद कर दिया गया है, जिससे इसके कंटेंट को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
बयान में हुए चौंकाने वाले खुलासे
सूत्रों के अनुसार, फैज अक अहमद ने अपने बयान में शराब घोटाले से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने कोर्ट के समक्ष IAS अधिकारी और तत्कालीन उत्पाद विभाग के सचिव विनय चौबे की भूमिका को लेकर अहम जानकारियां साझा की हैं।
बताया जा रहा है कि फैज अक अहमद ने अपने बयान में पूरे मामले का “कच्चा चिट्ठा” खोलते हुए यह स्पष्ट किया है कि शराब नीति, टेंडर प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णय किस स्तर पर लिए गए और उनमें किन अधिकारियों की भूमिका रही।
विनय चौबे की भूमिका पर फिर सवाल
फैज अक अहमद के 164 बयान के बाद अब जांच की दिशा एक बार फिर तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे पर केंद्रित होती नजर आ रही है। पहले से ही शराब घोटाले में उनकी भूमिका को लेकर ACB और अन्य एजेंसियां जांच कर रही हैं, लेकिन अब एक वरिष्ठ IAS अधिकारी के न्यायिक बयान से मामला और गंभीर हो गया है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि 164 के तहत दर्ज बयान को अदालत में अहम सबूत माना जाता है और यह आगे की जांच और अभियोजन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
शराब घोटाले की जांच में नया मोड़
झारखंड शराब घोटाले को राज्य के सबसे बड़े प्रशासनिक घोटालों में गिना जा रहा है। इसमें करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान, नीति में हेरफेर और ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप पहले से लगते रहे हैं। अब फैज अक अहमद के बयान के बाद यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि नौकरशाही की जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल फैज अक अहमद का बयान सीलबंद है, लेकिन जांच एजेंसियों के लिए यह एक मजबूत आधार बन सकता है। आने वाले दिनों में और अधिकारियों से पूछताछ, नए समन और कानूनी कार्रवाई के संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि इस बयान के खुलने के बाद कौन-कौन से बड़े नाम जांच के दायरे में आते हैं।








