संसद में सियासी संग्राम: राष्ट्रपति अभिभाषण पर बहस, आज पीएम मोदी का जवाब
नई दिल्ली: देश की संसद में बजट सत्र के दौरान सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को सत्र का पांचवां दिन है और दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को लेकर जोरदार बहस जारी है। राजनीतिक हलकों की नजरें आज लोकसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इस बहस का जवाब देने वाले हैं।
राष्ट्रपति अभिभाषण पर बहस क्यों अहम?
यह धन्यवाद प्रस्ताव 28 जनवरी को संसद के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिए गए अभिभाषण के जवाब में लाया गया है। इस अभिभाषण में सरकार की नीतियों, योजनाओं और भविष्य की दिशा का खाका पेश किया गया था। अब संसद में इस पर चर्चा के दौरान विपक्ष सरकार को घेर रहा है, जबकि सत्तापक्ष अपनी उपलब्धियों को गिना रहा है।
लोकसभा में तीखी नोकझोंक
लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने पेश किया था, जिसका समर्थन भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने किया। इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सदन ने कुल 18 घंटे का समय तय किया है।
बहस के दौरान बेरोजगारी, महंगाई, किसानों के मुद्दे, राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक नीतियों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। प्रधानमंत्री के जवाब को इस बहस का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है, जहां सरकार विपक्ष के सवालों का सीधा जवाब देगी।
राज्यसभा में भी गरम माहौल
उधर राज्यसभा में भाजपा सांसद सदानंद मास्टर ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया है। उच्च सदन में भी विभिन्न दलों के सांसद सरकार की नीतियों पर अपने-अपने नजरिए से चर्चा कर रहे हैं। विपक्ष यहां भी केंद्र सरकार पर संस्थाओं के दुरुपयोग और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर हमला बोल रहा है।
राहुल गांधी के बयान पर बवाल
मंगलवार को लोकसभा की कार्यवाही उस वक्त बाधित हो गई जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का मुद्दा उठाया। इस बयान के बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
स्थिति इतनी बिगड़ी कि नियमों के उल्लंघन और अध्यक्ष की ओर कागज फेंकने के आरोप में आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक आवाज दबाने का आरोप लगाया।
लंबा चलेगा यह सत्र
इस बार संसद का बजट सत्र कुल 65 दिनों तक चलेगा और इसमें 30 बैठकें प्रस्तावित हैं। सत्र 13 फरवरी को अवकाश के लिए स्थगित होगा और 9 मार्च से फिर शुरू होकर 2 अप्रैल को समाप्त होगा। इस दौरान स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की जांच भी करेंगी।
आज प्रधानमंत्री के जवाब के बाद यह साफ हो सकेगा कि सरकार विपक्ष के आरोपों का कैसे सामना करती है और आने वाले दिनों में संसद का सियासी माहौल किस दिशा में जाएगा।








