डिजिटल करेंसी को बढ़ावा देने की तैयारी, गांधीनगर में शुरू हुआ नया पायलट प्रोजेक्ट
नई दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ती डिजिटल व्यवस्था के बीच अब अपराध जगत भी हाईटेक होता नजर आ रहा है। ऑनलाइन इंटरव्यू, मीटिंग, शॉपिंग और डिजिटल पेमेंट के दौर में सरकार डिजिटल करेंसी यानी ई-रुपये को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी कड़ी में गुजरात के गांधीनगर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने डिजिटल करेंसी के दूसरे पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की।
पीडीएस स्तर से डिजिटल करेंसी की शुरुआत
सरकार ने डिजिटल रुपये को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए सबसे निचले स्तर यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से शुरुआत की है। इस हाईटेक व्यवस्था के तहत अब एटीएम जैसी मशीनों से गेहूं, चावल और चीनी निकलेगी और इसके बदले डिजिटल करेंसी से भुगतान करना होगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा और नकद लेनदेन पर निर्भरता कम होगी।
क्या है डिजिटल करेंसी यानी ई-रुपया
डिजिटल करेंसी, जिसे हिंदी में ई-रुपया कहा जाता है, असल में आपके नोट और सिक्कों का डिजिटल रूप है। इसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जारी करता है और इसकी वैल्यू कागजी नोट के बराबर ही होती है। अभी देश में 50 पैसे से लेकर 500 रुपये तक के डिजिटल नोट उपलब्ध हैं। दैनिक जीवन में इसका उपयोग बिल्कुल नकदी की तरह किया जा सकता है, चाहे सब्जी खरीदनी हो, चाय का भुगतान करना हो या छोटे लेनदेन करने हों।
यूपीआई और ई-रुपये में क्या है फर्क
सरकार लगातार लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि डिजिटल रुपया और यूपीआई एक जैसे नहीं हैं। यूपीआई एक पेमेंट सिस्टम है, जिसके जरिए बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। वहीं ई-रुपया खुद पैसा है, जिसे डिजिटल वॉलेट में रखा जा सकता है।
यूपीआई के लिए बैंक खाता जरूरी होता है, जबकि डिजिटल रुपया बैंक खाते से स्वतंत्र रूप से भी काम कर सकता है। डिजिटल रुपया सीधे आरबीआई की देनदारी होता है और उसके बैलेंस शीट में दिखाई देता है, जबकि यूपीआई में जमा राशि बैंक की जिम्मेदारी होती है।
डिजिटल लेनदेन में तेजी से बढ़ोतरी
पिछले एक दशक में देश में डिजिटल लेनदेन में जबरदस्त उछाल आया है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल ट्रांजेक्शन में करीब दस हजार गुना तक की वृद्धि दर्ज की गई है। यही वजह है कि सरकार अब डिजिटल करेंसी को भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा मान रही है।
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर नागरिक डिजिटल रुपये का इस्तेमाल करे और देश पूरी तरह डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर आगे बढ़े। गांधीनगर में शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।








