चतरा एयर एंबुलेंस हादसा: सुरक्षा तंत्र पर उठे सवाल, 5-5 करोड़ मुआवजे की मांग

Chatra News

DGCA और निगरानी एजेंसियों की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह, पारा मेडिकल समुदाय में आक्रोश

रांची : झारखंड के चतरा में हुए एयर एंबुलेंस हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना में स्वास्थ्यकर्मियों की मौत के बाद विमान सुरक्षा, निगरानी तंत्र और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आ रही जानकारियों ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

घटना के बाद ऑल झारखंड पारा मेडिकल एसोसिएशन (AJPMA) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ ने न केवल हादसे की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, बल्कि मृतक डॉक्टर विकास गुप्ता और नर्सिंग स्टाफ सचिन कुमार के परिवार को पांच-पांच करोड़ रुपये का मुआवजा देने की भी मांग उठाई है।

“सुरक्षा मानकों की हो जांच”
AJPMA का कहना है कि एयर एंबुलेंस सेवा जीवन रक्षक सेवा मानी जाती है, ऐसे में उसकी सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी जांच अत्यंत सख्त होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

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संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विमान की नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट सही तरीके से हो रहे थे या नहीं। DGCA और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की पारदर्शी जांच आवश्यक है।

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पारा मेडिकल समुदाय में शोक और आक्रोश
डॉक्टर विकास गुप्ता और सचिन कुमार की मौत से पारा मेडिकल समुदाय गहरे सदमे में है। AJPMA ने कहा कि दोनों स्वास्थ्यकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जान गंवा बैठे। ऐसे में सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि उनके परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता और उचित मुआवजा दिया जाए।

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संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को कम से कम पांच-पांच करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए, साथ ही एक सदस्य को सरकारी नौकरी और बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार उठाए।

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व्यापक जांच की मांग
विशेषज्ञों का मानना है कि एयर एंबुलेंस सेवाओं की निगरानी और संचालन व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जरूरत है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आपातकालीन सेवाओं में भी सुरक्षा प्रोटोकॉल से किसी प्रकार का समझौता गंभीर परिणाम ला सकता है। राज्य सरकार की ओर से अब तक आधिकारिक जांच के आदेश दिए जा चुके हैं, लेकिन पारा मेडिकल संघ का कहना है कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होनी चाहिए।

फिलहाल पूरा राज्य शोक में है और सभी की नजरें सरकार तथा जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा और जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है।

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