IEA की बड़ी चेतावनी- घट रहा वैश्विक तेल भंडार, सप्लाई पर बढ़ा दबाव
ईरान संघर्ष से दुनिया पर तेल संकट का खतरा
नई दिल्लीः International Energy Agency ने अपनी ताजा “ऑयल मार्केट रिपोर्ट- मई 2026” में दुनिया को बड़े ऊर्जा संकट को लेकर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक तेल उत्पादन और सप्लाई पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है और आने वाले महीनों में दुनिया को गंभीर सप्लाई संकट का सामना करना पड़ सकता है।
आईईए ने कहा है कि युद्ध शुरू होने के करीब दस हफ्तों बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास लगातार तनाव बना हुआ है, जिसके कारण तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सप्लाई बाधित होने की वजह से दुनिया का तेल भंडार तेजी से घट रहा है। कई देशों ने अपने रणनीतिक भंडार का इस्तेमाल शुरू कर दिया है ताकि घरेलू बाजार में ईंधन संकट को रोका जा सके। हालांकि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि तेल भंडार घटने और उत्पादन कम होने का असर आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर साफ दिखाई देगा। पहले से ही कई देशों में ईंधन की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं।
आईईए की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर मिल रहे विरोधाभासी संकेतों की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। कभी युद्ध बढ़ने की खबर से तेल कीमतों में तेजी आती है, तो कभी बातचीत की उम्मीद से बाजार थोड़ा शांत होता दिखाई देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस अनिश्चित माहौल के कारण निवेशक भी सतर्क हो गए हैं। शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट दोनों में अस्थिरता बढ़ गई है। कई निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ रुख कर रहे हैं, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर इस संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ेगा और इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो महंगाई और बढ़ सकती है। परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक लागत बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
इसी खतरे को देखते हुए कई देशों ने ईंधन बचत अभियान शुरू कर दिए हैं। भारत में भी पेट्रोल-डीजल बचाने और गैरजरूरी खर्च कम करने को लेकर सरकार लगातार अपील कर रही है। सरकारें अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और ऊर्जा प्रबंधन की दिशा में भी तेजी से काम कर रही हैं।
आईईए ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में हालात और गंभीर हो सकते हैं। दुनिया के कई देशों के लिए यह संकट आर्थिक चुनौती के साथ-साथ रणनीतिक चिंता का विषय भी बनता जा रहा है।






