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पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी पर सियासत तेज, विपक्ष का मोदी सरकार पर हमला

Petrol Diesel Price Hike Politics

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आम जनता पर महंगाई का बोझ डालने का आरोप लगाया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए सरकार का बचाव किया है और दावा किया है कि दुनिया के मुकाबले भारत में ईंधन कीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी हुई है।

कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पेट्रोल-डीजल कीमतों में वृद्धि को लेकर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही “वसूली” शुरू हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच सरकार ने एक बार फिर आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है। पार्टी की ओर से कहा गया कि “महंगाई मैन मोदी” ने जनता पर फिर हंटर चलाया है और आम आदमी की जेब पर सीधा हमला किया गया है।

अखिलेश यादव बोले- “साइकिल ही विकल्प”
अखिलेश यादव ने भी ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब पेट्रोल-डीजल इतना महंगा हो चुका है कि “साइकिल ही सबसे बेहतर विकल्प” बचा है। सोशल मीडिया पर उनका यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है और समर्थक इसे आम जनता की परेशानी से जोड़कर देख रहे हैं।

विपक्ष ने महंगाई को बनाया बड़ा मुद्दा
विपक्षी दलों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने से सिर्फ वाहन चालकों पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि परिवहन महंगा होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ेंगे। राजनीतिक दलों ने आरोप लगाया कि पहले से महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही जनता को सरकार ने और संकट में डाल दिया है।

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भाजपा ने किया पलटवार
विपक्ष के हमलों के बीच अमित मालवीय ने सोशल मीडिया के जरिए कांग्रेस और विपक्षी दलों पर पलटवार किया। उन्होंने दुनिया के कई देशों में ईंधन कीमतों में हुई बढ़ोतरी की तुलना साझा करते हुए दावा किया कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम वैश्विक स्तर की तुलना में कम बढ़े हैं। अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस को सरकार पर सवाल उठाने से पहले वैश्विक हालात और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की स्थिति को समझना चाहिए।

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“कांग्रेस को शर्म आनी चाहिए”
भाजपा नेताओं ने कहा कि मिडिल ईस्ट संकट और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बावजूद भारत सरकार ने आम जनता पर न्यूनतम असर डालने की कोशिश की है। भाजपा का दावा है कि कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारत से कहीं अधिक वृद्धि हुई है। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया।

मिडिल ईस्ट संकट का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान-अमेरिका तनाव और मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक संकट का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

आम जनता की बढ़ी चिंता
ईंधन कीमतों में वृद्धि के बाद आम लोगों की चिंता भी बढ़ गई है। वाहन चालकों, ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और मध्यम वर्गीय परिवारों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में महंगाई और बढ़ सकती है।

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
पेट्रोल-डीजल कीमतों में वृद्धि को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक तरफ विपक्ष सरकार को महंगाई के मुद्दे पर घेर रहा है, वहीं भाजपा समर्थक वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देते हुए सरकार का बचाव कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर देश की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्ष जहां इसे जनता पर आर्थिक हमला बता रहा है, वहीं भाजपा इसे वैश्विक संकट का असर बताते हुए सरकार की नीतियों का बचाव कर रही है।

अब आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।

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