वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट में मना 18वां प्रो. औतार सिंह पेंटल मेमोरियल ओरेशन, निदेशक प्रो. राजकुमार ने गिनाई उपलब्धियां

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18th Autar Singh Paintal Memorial Oration: नई दिल्ली में स्थित वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट में आज 18वें प्रोफेसर औतार सिंह ओरेशन प्रोग्राम मनाया गया। इस मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें संस्थान के शिक्षक, एलुमनाई, कई प्रोफेसर व डॉक्टर शामिल हुए। इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राजकुमार ने आगत अतिथियों का स्वागत किया है। कार्यक्रम में उन्होंने विशेष तौर पर प्रोफेसर डॉ. अशोक शाह का स्वागत करते हुए कहा कि सर के बारे में मैं कुछ बोल नहीं सकता हूं क्योंकि सर हमारे शिक्षक थे और हैं। जो कुछ भी हमने सिखा है सर के मार्गदर्शन में ही सिखा है। सर मुझे वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट में अपना पहला दिन भी याद है, जब मैंने एक पीजी छात्र के रूप में संस्थान में आया था।

अच्छा ह्यूम्न बिंग एक अच्छा शिक्षक, एडमिनिस्ट्रेटर व डॉक्टर होता हैः याद है कि आप अपने कमरे थे और आपकी घड़ी नीचे पड़ी हुई थी और मुझे आपके कमरे में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। मैं तो ये कहूंगा कि हम सभी छात्र सौभाग्यशाली हैं कि अशोक शाह जैसे शिक्षक मिले जिन्होंने हमलोगों चेस्ट डिजिज के बारे में शिक्षा दी। आपके बारे में तो बहुत कुछ बोला जाएगा, लेकिन आप वास्तव में ही एक अच्छे शिक्षक और मार्गदर्शक हैं। प्रोफेसर राजकुमार ने आगे कहा कि मेरा मानना है कि जब एक व्यक्ति अच्छा ह्यूम्न बिंग होता है तो वो अपने आप ही एक अच्छा शिक्षक, एडमिनिस्ट्रेटर और एक अच्छा डॉक्टर बन जाता है। सर मैं आपका (अशोक शाह) इस ओरेशन प्रोग्राम में स्वागत करता हूं। प्रो. मंदिरा वर्मा डिपार्टमेंट ऑफ माइक्रोबायोलोजी, वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट और अन्य विभागों के फैकेल्टी मेंबर, एलुमनाई व छात्र-छात्राएं। भाइंयो एंव बहनों वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट की तरफ से यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मुझे आज के दिन आप सभी का स्वागत करने का मौका मिला है।

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इस साल हम 75वां स्थापना दिवस भी मनाएंगेः राजकुमार ने कहा कि आज संस्थान देश की सेवा करते हुए अपने 75 वर्षों की यात्रा को सफलतापूर्वक पूर्ण करने की ओर अग्रसर रहा है। इस संस्थान की स्थापना सन 1949 में हुई थी। आज हम इस स्थापना दिवस को अपने विभिन्न रिसर्च और आकादमीक उपल्बधियों के साथ उत्साहपूर्वक मना रहे हैं। जैसा की आप जानते हैं कि संस्थान बहुत सारे वर्कशॉप, सेमिनार, मेंटल एजुकेशन प्रोग्राम, पब्लिक अवेयरनेस प्रोग्राम करते रहा है और कर भी रहा है ताकि लोगों के बीच चेस्ट डिजिज की जागरूकता बढ़े।

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2005 में शुरू हुआ था पहला ओरेशनः उन्होंने कहा कि 18वें प्रोफेसर औतार सिहं पेंटल मेमोरियल ओरेशन वल्लभ भाई चेस्ट इंस्टीट्यूट का एक महत्वपूर्ण वार्षिक कार्यक्रम है। इस सीरीज का पहला प्रोग्राम वर्ष 2005 में शुरू हुआ था। वे इस संस्थान के वर्ष 1964 से 90 तक निदेशक भी रहे थे। प्रोफेसर पेंटल अपने महत्वपूर्ण खोज के लिए जाने जाते हैं, जिन्होंने 1955 में जे-रिसेप्टर की खोज की थी जिस कारण से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती थी। उन्होंने कई वर्षों तक संस्थान का मार्गदर्शन किया और उनके योगदान को ओपेन ए न्यू एरा इन फिजियोलॉजी जिसे कि प्री-पेंटल एरा और पोस्ट पेंटल एरा के नाम से जाना जाता है।

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आज मैं इस अवसर मैं आपको इस संस्थान के जेनेसिस और मैनडेट के बारे में बताना चाहता हूं। इस संस्थान की नींव देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और देश के पहले गृहमंत्री के रूप में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 6 अप्रैल 1949 को रखी थी। संस्थान का औपचारिक तौर पर उद्घाटन तत्कालीन यूनियन मिनिस्टर ऑफ पब्लिक अफेयर्स राजकुमारी अमृता कौर ने 12 जनवरी 1952 में किया था। क्लीनिकल रिसर्च सेंटर जिसका कि नाम अब विश्वनाथन चेस्ट हास्पिटल है, उसका उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में डा. राजेंद्र प्रसाद ने 24 अक्टूबर 1957 में किया था। संस्थान का उद्देश्य चेस्ट डिजिज से संबंधित क्लीनिकल रिसर्च करना है। पीजी स्टूडेंट्स को ट्रेन करान और नई मेडिकल तकनीक को बढ़ाना है।

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