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बोकारो में ईडी का बड़ा एक्शन – वन भूमि घोटाले की जांच में आधा दर्जन ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, सरकारी दफ्तरों में मचा हड़कंप!

वन भूमि घोटाला

बोकारो, झारखंड:- झारखंड में भ्रष्टाचार के बड़े अड्डे एक-एक कर बेनकाब हो रहे हैं। बोकारो में करोड़ों के वन भूमि घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने आज तड़के बड़ी कार्रवाई की है। तेतुलिया मौजा की 103 एकड़ विवादित जमीन के फर्जीवाड़े में अब आधा दर्जन ठिकानों पर ईडी की छापेमारी हो रही है। सवाल बड़ा है — आखिर किसके संरक्षण में इतने सालों तक होता रहा ये वन भूमि घोटाला?”

झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बोकारो के बहुचर्चित तेतुलिया वन भूमि घोटाले के सिलसिले में आज सुबह से एक साथ आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी है, जिससे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

मिली जानकारी के अनुसार मनमोहन कंस्ट्रक्शन कार्यालय, वन विभाग कार्यालय, बोकारो उपायुक्त कार्यालय, निबंधन कार्यालय ,अंचल कार्यालय, उकरीद स्थित इजहार हुसैन और अख्तर हुसैन का आवास, तेतुलिया स्थित उमायुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड किशोर किस्कू का घर, वन भूमि पर बनाए गए कथित फर्जी कार्यालय में ED की ताबड़तोड़ छापेमारी चल रही है.

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ईडी की ये कार्रवाई तेतुलिया मौजा की 103 एकड़ विवादित वन भूमि को लेकर हुए भारी फर्जीवाड़े के सिलसिले में हो रही है। इस जमीन को अवैध तरीके से निजी कंपनियों को बेचने और रजिस्ट्री कराने का आरोप है, जिसमें कई प्रभावशाली रैयत, दलाल और सरकारी अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

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प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर वन भूमि की अवैध रजिस्ट्री कराई गई, जिसमें बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट कंपनियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत सामने आ रही है।

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ईडी की टीम दस्तावेजों की जांच कर रही है, कंप्यूटर सीज़ किए गए हैं, और संदिग्ध लेन-देन की बैंक डिटेल्स खंगाली जा रही हैं।

ईडी की छापेमारी से सरकारी दफ्तरों में अफरा-तफरी मची हुई है। कई अधिकारी फाइलें छुपाने में लगे देखे गए तो कई गायब हैं। आम जनता और विपक्षी दल भी इस कार्रवाई पर निगाहें टिकाए हुए हैं।

सूत्रों के मुताबिक यह मामला सिर्फ बोकारो तक सीमित नहीं है — यह जमीन घोटाला झारखंड के कई जिलों तक फैला हुआ हो सकता है। ईडी को मिली गुप्त जानकारी के अनुसार वन भूमि को करोड़ों में बेचने और उस पर अवैध निर्माण कराने का खेल वर्षों से चल रहा था, जिसमें सरकारी संरक्षण की भूमिका भी संदिग्ध है।

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