लद्दाख हिंसा: केंद्र ने सोनम वांगचुक को बताया जिम्मेदार, कहा – ‘अरब स्प्रिंग’ और ‘Gen Z’ आंदोलन का हवाला देकर भड़काया

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लेह में अचानक भड़की हिंसा, 4 की मौत

लद्दाख: सबसे शांत इलाके कहे जाने वाले लद्दाख के लेह जिले में बुधवार को अचानक हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी, आगजनी और पुलिस से झड़प की। बीजेपी दफ्तर और वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई और 70 से अधिक घायल हैं।

सोनम वांगचुक की मांगें और भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक 10 सितंबर से भूख हड़ताल पर थे। उनकी चार प्रमुख मांगें –

  • लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा
  • छठी अनुसूची में संवैधानिक सुरक्षा
  • कारगिल और लेह को अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र
  • सरकारी नौकरियों में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता

केंद्र का बयान – ‘भीड़ को भड़काया’
गृह मंत्रालय ने दावा किया कि वांगचुक ने ‘अरब स्प्रिंग’ और नेपाल के ‘Gen Z’ आंदोलनों का जिक्र कर युवाओं को भड़काया। मंत्रालय के अनुसार सरकार लगातार संवाद में थी और 6 अक्टूबर को अगली बैठक तय थी।

सरकार की ओर से उठाए गए कदम
गृह मंत्रालय ने कहा कि लद्दाख में अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 45% से बढ़ाकर 84% किया गया है। परिषदों में महिलाओं को 1/3 आरक्षण दिया गया, भोटी व पुर्गी भाषाओं को आधिकारिक मान्यता मिली और 1800 पदों पर भर्ती शुरू हुई।

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हिंसक विरोध की शुरुआत कैसे हुई
सितंबर को लेह के NDS मेमोरियल ग्राउंड में बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी जुटे। वहां से बीजेपी दफ्तर और हिल काउंसिल पर पथराव, आगजनी हुई। पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी, जिसमें मौतें हुईं।

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छठी अनुसूची और लद्दाख
संविधान की छठी अनुसूची में असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय इलाकों में स्वशासन का प्रावधान है। वांगचुक और उनके समर्थक चाहते हैं कि यह अधिकार अब लद्दाख को भी मिले।

दो बड़े संगठन – लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस
इन दोनों संगठनों ने केंद्र के साथ बातचीत की थी। 6 अक्टूबर को अगली बैठक तय थी, लेकिन उससे पहले ही हिंसा भड़क गई।

सोनम वांगचुक की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
हिंसा के वक्त सोनम वांगचुक की ओर से कोई बयान नहीं आया। बाद में उन्होंने हिंसा को ‘लद्दाख के Gen-Z युवाओं की भड़ास’ बताते हुए 15 दिन का उपवास तोड़ा और शांति की अपील की।

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