रांची में एचईसी के सप्लाई कर्मियों को वेतन न मिलने से नाराज़गी, प्रबंधन के खिलाफ विरोध तेज
HEC Supply Workers Wage Disputeस्थायी कर्मचारियों को मिला वेतन, सप्लाई कर्मियों को दो साल से लंबित बकाया न मिलने से गुस्सा; दुर्गा पूजा पर भी निराशा
रांची: हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) में काम करने वाले सप्लाई कर्मियों को एक बार फिर त्योहारी सीज़न में भारी निराशा हाथ लगी है। निगम प्रबंधन ने जहां स्थायी कर्मचारियों को 25 सितंबर को एक माह का वेतन बैंक खातों में भेज दिया, वहीं सप्लाई कर्मियों को दो साल से लंबित बकाया वेतन के नाम पर फूटी कौड़ी तक नहीं दी।
दुर्गा पूजा जैसे बड़े पर्व पर मजदूरों के हाथ खाली रह जाने से गुस्सा बढ़ गया है। सप्लाई कर्मियों ने शुक्रवार से काम बंद कर दिया और प्रबंधन के खिलाफ विरोध तेज कर दिया।
हटिया कामगार यूनियन (एटक) के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर निगम प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि निगम लगातार सप्लाई कर्मियों की मेहनत और हक को नजरअंदाज कर रहा है। “पैसा मांगने पर आनाकानी की जा रही है। दुर्गा पूजा जैसे बड़े पर्व पर भी मजदूरों के घरों का चूल्हा ठंडा है,” उन्होंने कहा।
लालदेव सिंह ने आरोप लगाया कि प्रबंधन की तरक्की के दावे सिर्फ कागजों पर हैं, जबकि हकीकत में मजदूरों के घरों की हालत खराब है। “जब परिवारों को खुशियां मनाने के बजाय रोटी की चिंता सताती है, तो निगम की तरक्की के दावों की असलियत खुद सामने आ जाती है,” उन्होंने जोड़ा।
दो साल से लंबित वेतन
सप्लाई कर्मियों का बकाया वेतन दो साल से अटका हुआ है। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने कई बार मांग उठाई लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन देकर टाल दिया गया। इस बार भी जब वेतन की उम्मीद थी, तो प्रबंधन ने उसे भी तोड़ दिया।
तरक्की बनाम हक़
यूनियन का सवाल है कि जब निगम यह कह रहा है कि उत्पादन में वृद्धि हो रही है और वह तरक्की की राह पर है, तो मजदूरों को नियमित वेतन क्यों नहीं दिया जा रहा। क्या तरक्की का मतलब सिर्फ ऊपरी प्रबंधन के ऐशो-आराम से है?
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर प्रबंधन ने जल्द ही सप्लाई कर्मियों का बकाया वेतन नहीं दिया, तो विरोध और तेज किया जाएगा।
मजदूरों में गुस्सा
दुर्गा पूजा के मौके पर मजदूरों के घरों में उत्सव की जगह चिंता का माहौल है। बच्चों की पढ़ाई और परिवार के खर्च के लिए पैसा न होने से कर्मचारियों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। यूनियन ने इस मसले को सरकार और स्थानीय प्रशासन के सामने उठाने का भी संकेत दिया है।








