गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर आमंत्रित हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

Punjab Ministers Ranchi visit

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और राजस्व मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां ने रांची में की सौजन्य भेंट

रांची, झारखंड: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से आज पंजाब सरकार के दो वरिष्ठ मंत्री — स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और राजस्व, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री हरदीप सिंह मुंडियां ने कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को सिख गुरु श्री तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले विशेष राष्ट्रीय कार्यक्रम में सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया।

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गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को जन-जन तक पहुंचाने का उद्देश्य
पंजाब सरकार के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि यह आयोजन गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान, त्याग, समर्पण और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।
यह कार्यक्रम न केवल सिख धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए धार्मिक एकता, मानवता और सहिष्णुता का प्रतीक बनेगा।

डॉ. बलबीर सिंह ने कहा —

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“गुरु तेग बहादुर जी ने धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका संदेश आज भी समाज में शांति और सौहार्द्र बनाए रखने की प्रेरणा देता है।”

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मुख्यमंत्री ने जताया आभार, कहा — गुरु परंपरा हमारी आत्मा की पहचान
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पंजाब सरकार की इस पहल की सराहना की और आयोजन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा —

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“गुरु तेग बहादुर जी का जीवन त्याग, साहस और मानवता की मिसाल है। उन्होंने देश और धर्म की रक्षा के लिए जो सर्वोच्च बलिदान दिया, वह भारत के इतिहास का गौरवपूर्ण अध्याय है।”

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उन्होंने आगे कहा कि भारत की विविधता और एकता में सिख गुरु परंपरा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

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“गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक सभी गुरुओं ने हमें समानता, सेवा और बलिदान का संदेश दिया। यह हमारे सामाजिक ताने-बाने की आत्मा है।”

देशभर से आएंगे संत, महात्मा और गणमान्य नागरिक
आयोजन में देशभर के संत-महात्मा, धार्मिक प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक आमंत्रित किए गए हैं।
कार्यक्रम के दौरान गुरु तेग बहादुर जी के जीवन, शिक्षाओं और बलिदान पर केंद्रित संगोष्ठियाँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और धार्मिक सभाएँ आयोजित की जाएँगी। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि आयोजन का मकसद केवल स्मरण नहीं बल्कि युवाओं में गुरु के आदर्शों को आत्मसात करने की प्रेरणा देना है।

गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान — धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक
गुरु तेग बहादुर जी, जो सिखों के नवें गुरु थे, उन्होंने 1675 में धर्म और आस्था की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उनकी शहादत ने यह संदेश दिया कि “धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि न्याय और मानवता का मूल है।”
इसी कारण उन्हें ‘हिन्द की चादर’ कहा गया।

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उनके द्वारा दिया गया संदेश — “मनुष्य का कर्तव्य है कि वह सत्य के लिए खड़ा हो, चाहे इसके लिए उसे बलिदान ही क्यों न देना पड़े” — आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता के लिए दी शुभकामनाएँ
मुख्यमंत्री ने पंजाब सरकार के दोनों मंत्रियों को धन्यवाद देते हुए आयोजन की सफलता के लिए अपनी ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
उन्होंने कहा —

“यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम है, जो समाज में एकता, शांति और आपसी सद्भाव का संदेश देगा। झारखंड की जनता की ओर से मैं इस आयोजन की सफलता की कामना करता हूँ।”

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झारखंड और पंजाब — संस्कृति और संवेदना का साझा रिश्ता
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड और पंजाब दोनों राज्य संवेदना, परंपरा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े हुए हैं।
जहाँ पंजाब अपने शौर्य, सेवा और संगत-सेवा की परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, वहीं झारखंड आदिवासी संस्कृति, भाईचारे और सामुदायिक सौहार्द्र की भूमि है। दोनों राज्यों की यह साझी विरासत भारत की एकता और विविधता का प्रतीक है।

इस मुलाकात ने झारखंड और पंजाब के बीच सांस्कृतिक सहयोग और आध्यात्मिक एकता के रिश्ते को और सशक्त किया है।
गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस का यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए त्याग, साहस और मानवता का संदेश लेकर आएगा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन का इस कार्यक्रम में सम्मिलित होना न केवल झारखंड के गौरव को बढ़ाएगा, बल्कि देशभर में धार्मिक सौहार्द्र और एकता के संदेश को नई दिशा देगा।

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