सारंडा के दीघा जंगल में IED विस्फोट, 11 वर्षीय बच्ची की दर्दनाक मौत
पश्चिमी सिंहभूम: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में एक बार फिर नक्सली हिंसा ने मासूम जान ले ली। जराईकेला थाना क्षेत्र के दीघा गांव के हिंदकुडी जंगल में मंगलवार की सुबह हुए आईईडी विस्फोट में 11 साल की बच्ची की मौत हो गई। मृतका की पहचान जयमसीह हेरंज की बेटी सीरिया हेरंज के रूप में हुई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बच्ची रोज़ की तरह जंगल में साल पत्ता तोड़ने गई थी, लेकिन वहां नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी की चपेट में आ गई।
धमाका इतना भीषण था कि दोनों पैर उड़ गए
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही सीरिया हेरंज का पैर आईईडी पर पड़ा, तेज धमाके के साथ विस्फोट हुआ। धमाका इतना जबरदस्त था कि बच्ची के **दोनों पैर मौके पर उड़ गए और उसने वहीं पर दम तोड़ दिया। घटना के बाद ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और किसी को समझ नहीं आया कि विस्फोट कहां से हुआ।
ग्रामीणों में दहशत, जंगल में नहीं जा रहे लोग
इस घटना के बाद दीघा और आसपास के गांवों में भय और दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब जंगल में साल पत्ता या लकड़ी लेने जाने से डर रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे जंगल की सर्चिंग कर आईईडी हटाए जाएं, ताकि फिर कोई निर्दोष इसकी चपेट में न आए।
पुलिस और सीआरपीएफ की टीम मौके पर रवाना
घटना की सूचना मिलते ही जराईकेला थाना पुलिस और सीआरपीएफ के जवान मौके के लिए रवाना हो गए। क्षेत्र पूरी तरह नक्सल प्रभावित है, जिसके कारण सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। पुलिस को आशंका है कि आसपास के इलाकों में भी एक से अधिक आईईडी लगाए गए हो सकते हैं।
नक्सलियों के दहशत फैलाने की रणनीति
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, नक्सली अक्सर जंगलों में सुरक्षा बलों की मूवमेंट रोकने और दहशत फैलाने के लिए आईईडी लगाते हैं।लेकिन इनका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। हाल ही में सारंडा और तोपो क्षेत्र में भी कई जगहों पर आईईडी बरामद हुए थे।
सुरक्षा बलों ने क्षेत्र किया सील, जांच जारी
पुलिस ने घटनास्थल को पूरी तरह घेरा बंदी (Cordoned Off) कर लिया है। बम निरोधक दस्ते (BDDS) को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि आसपास के क्षेत्र की जांच की जा सके। फिलहाल शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है।
स्थानीय प्रशासन ने जताया शोक
प्रशासनिक अधिकारियों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा है कि इस तरह के कृत्य नक्सलियों की अमानवीय मानसिकता को दर्शाते हैं। पुलिस ने कहा कि क्षेत्र में अब सघन तलाशी अभियान चलाया जाएगा ताकि और आईईडी न बचे।
झारखंड में नक्सली हिंसा का पुराना अड्डा है सारंडा
सारंडा जंगल कभी माओवादी संगठन (CPI-Maoist) का मजबूत गढ़ माना जाता था। हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों ने कई सफल अभियान चलाए, लेकिन अभी भी कुछ हिस्सों में स्लीपर मॉड्यूल सक्रिय हैं। आईईडी घटनाएं बताती हैं कि नक्सली संगठन अब भी सुरक्षा बलों को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।
सारंडा के हिंदकुडी जंगल में मासूम बच्ची की मौत ने फिर एक बार साबित कर दिया कि नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी सिर्फ सुरक्षा बलों के लिए नहीं, बल्कि ग्रामीण जनजीवन के लिए भी घातक जाल बन चुके हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ा सवाल है कि आखिर इन विस्फोटकों को जंगलों में इतनी आसानी से कौन और कैसे लगा देता है।








