...

प्रशांत किशोर दो राज्यों के मतदाता सूची में दर्ज! BJP ने लगाए दोहरे पंजीकरण के आरोप

Political Controversy

बिहार : जन सुराज अभियान के संस्थापक और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक नए विवाद में फंस गए हैं।
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रशांत किशोर का नाम बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया है। यह खुलासा सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन पर चुनाव कानून के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है।

अमित मालवीय ने बोला हमला
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर प्रशांत किशोर पर सीधा निशाना साधा।
उन्होंने कहा —

“जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पश्चिम बंगाल और बिहार दोनों राज्यों के मतदाता हैं। अगर उनकी पार्टी की बिहार में कोई वास्तविक उपस्थिति होती तो यह एक बड़ा विवाद होता, लेकिन जन सुराज का कोई महत्व नहीं है। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि राहुल गांधी के सभी सहयोगी ‘वोट चोरी’ में शामिल हैं। यह पाखंड हैरान करने वाला है।”

अमित मालवीय के इस बयान ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक हलचल मचा दी है।

Maa RamPyari Hospital

Telegram channel

BJP ने दिखाए चुनाव आयोग के दस्तावेज
बीजेपी ने दावा किया है कि चुनाव आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड से यह खुलासा हुआ है कि प्रशांत किशोर का नाम पश्चिम बंगाल के भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र (पार्ट नंबर-220) में दर्ज है। यह वही क्षेत्र है, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव लड़ा था। साथ ही, पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर का बिहार में भी वोटर आईडी सक्रिय है। इस प्रकार, वे एक साथ दो राज्यों में पंजीकृत मतदाता हैं, जो कि चुनाव कानून के धारा-17 और धारा-18 के तहत अवैध माना जाता है।

resizone elanza

धारा 17 और 18 के तहत अवैध है दोहरा पंजीकरण
चुनाव कानून के अनुसार, धारा 17 कहती है कि किसी व्यक्ति का नाम केवल एक ही विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज किया जा सकता है। वहीं, धारा 18 के तहत, यदि कोई व्यक्ति दो जगहों पर वोटर के रूप में पंजीकृत पाया जाता है, तो उसका एक पंजीकरण रद्द किया जा सकता है और उस पर कार्रवाई हो सकती है।

बीजेपी ने कहा कि इस पूरे मामले में चुनाव आयोग को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए और पीके पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

2025 की वोटर लिस्ट में शामिल है प्रशांत किशोर का नाम
पार्टी ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पोर्टल से जारी 2025 की अंतिम मतदाता सूची का हवाला दिया है,जिसमें भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रशांत किशोर का नाम दर्ज बताया गया है। बीजेपी ने यह भी कहा कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान पीके ने ममता बनर्जी के इसी क्षेत्र से मतदाता के रूप में नामांकन कराया था।

जन सुराज की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे विवाद पर अभी तक प्रशांत किशोर या उनकी पार्टी जन सुराज की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला यदि सही साबित होता है तो प्रशांत किशोर की **राजनीतिक विश्वसनीयता पर बड़ा असर डाल सकता है।

जन सुराज अभियान और पीके की भूमिका
प्रशांत किशोर ने 2022 में ‘जन सुराज’ अभियान की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य बिहार की राजनीति में नई दिशा देना था। उन्होंने राज्यभर में पदयात्रा करते हुए लोगों से संवाद किया और आगामी विधानसभा चुनावों में विकल्प की राजनीति का संदेश देने की कोशिश की।लेकिन अब यह विवाद उनकी राजनीतिक छवि के लिए चुनौती बन सकता है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
बीजेपी के आरोपों के बाद अब बिहार और बंगाल दोनों राज्यों की राजनीति में इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक इसे पीके की विश्वसनीयता पर हमला मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक साजिश बताकर खारिज कर रहे हैं। हालांकि, अगर चुनाव आयोग ने जांच शुरू की तो यह मामला गंभीर कानूनी रूप ले सकता है।

प्रशांत किशोर का नाम दो राज्यों की मतदाता सूची में होने के आरोप ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इसे “वोट चोरी” बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की है, जबकि पीके की तरफ से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।
अब सबकी नजर चुनाव आयोग की कार्रवाई पर टिकी है कि वह इस दोहरे पंजीकरण के मामले में क्या कदम उठाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *