JSSC CGL-2023 परीक्षा पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: CBI जांच की मांग पर 3 नवंबर को फिर सुनवाई

JSSC

झारखंड :झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL-2023) को लेकर जारी विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने CBI जांच की मांग से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित अंतरिम आदेश को बरकरार रखने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2025 को होगी।

यह मामला उस समय से चर्चा में है जब परीक्षा के तुरंत बाद अभ्यर्थियों के एक वर्ग ने सोशल मीडिया और जनहित याचिका के माध्यम से पेपर लीक और गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए थे। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि पूरी परीक्षा रद्द कर सीबीआई जांच कराई जाए ताकि दोषियों की जवाबदेही तय की जा सके।

राज्य सरकार का पक्ष: “पेपर लीक के साक्ष्य नहीं मिले”
राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोर्ट को बताया कि अब तक की जांच में पेपर लीक के कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड CID द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है, और प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, प्रश्नपत्र के लीक होने या परीक्षा की गोपनीयता भंग होने जैसी कोई पुष्टि नहीं हुई है।

महाधिवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि “विभिन्न वर्षों के कुछ प्रश्नों की पुनरावृत्ति” को कुछ लोग पेपर लीक से जोड़ रहे हैं, जबकि यह सामान्य परीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। कई कोचिंग संस्थानों के ‘गेस क्वेश्चन’ पेपर में समान प्रश्न होना ‘लीक’ का प्रमाण नहीं कहा जा सकता। उन्होंने बताया कि “संतोष मस्ताना” नामक व्यक्ति से पूछताछ में भी पेपर लीक का कोई साक्ष्य नहीं मिला है। यानी अब तक की जांच में सीबीआई जांच जैसी बाहरी एजेंसी की आवश्यकता नहीं दिखती।

Maa RamPyari Hospital

Telegram channel

याचिकाकर्ता की दलील: “भर्ती की पारदर्शिता खतरे में”
वहीं, याचिकाकर्ता प्रकाश कुमार एवं अन्य अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया कि JSSC परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उनके अनुसार, “कई केंद्रों पर पेपर का सील पहले से खुला पाया गया, बड़ी संख्या में प्रश्नों की पुनरावृत्ति हुई, और कुछ उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र मिल गया।” उन्होंने कोर्ट से मांग की कि इस गंभीर प्रकरण की सीबीआई जांच कराई जाए ताकि भविष्य की भर्तियों में पारदर्शिता बनी रहे और ईमानदार अभ्यर्थियों का हक सुरक्षित रहे।

resizone elanza

हस्तक्षेपकर्ताओं ने रखा पक्ष
इस सुनवाई में हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से भी पक्ष रखा गया। जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और प्रिंस कुमार ने कहा कि आयोग ने परीक्षा प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ कराई है। परीक्षा के दौरान या बाद में किसी भी केंद्र से औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी। आयोग ने सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाए थे, इसलिए सीबीआई जांच का कोई औचित्य नहीं बनता।

3 लाख से अधिक उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर
यह परीक्षा झारखंड के सबसे बड़े भर्ती अभियानों में से एक मानी जा रही थी।
JSSC CGL-2023 परीक्षा में कुल 3,04,769 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनके लिए 2025 पदों पर नियुक्ति होनी है। परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2023 को राज्यभर के विभिन्न केंद्रों पर आयोजित की गई थी। कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद से ही हजारों अभ्यर्थी सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर जांच की मांग कर रहे हैं। कई छात्रों ने ट्विटर (अब X) और फेसबुक पर #JSSC_CGL_ReExam ट्रेंड भी चलाया था।

अगली सुनवाई पर टिकी नज़रें
कोर्ट ने फिलहाल अपने अंतरिम आदेश को जारी रखते हुए किसी भी निर्णय पर रोक बनाए रखी है। अब 3 नवंबर को यह तय होगा कि हाईकोर्ट इस मामले को आगे किस दिशा में ले जाता है — क्या जांच CBI को सौंपी जाएगी या फिर राज्य की एजेंसी CID को ही जांच पूरी करने दी जाएगी। अभ्यर्थियों की निगाहें अब पूरी तरह अगली सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि फैसला आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि परीक्षा प्रक्रिया मान्य रहेगी या रद्द होगी।

विश्लेषण: JSSC की विश्वसनीयता पर उठे सवाल
यह विवाद न केवल अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि JSSC की संस्थागत विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं पर गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं — चाहे वह JSSC इंटरमीडिएट लेवल परीक्षा हो या PGTT भर्ती प्रक्रिया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि “अगर कोर्ट जांच CBI को सौंपता है तो इसका व्यापक प्रभाव झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर पड़ेगा।

झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन अंतरिम आदेश जारी रखकर यह संकेत जरूर दिया है कि अदालत मामले की गंभीरता से अवगत है। 3 नवंबर को होने वाली सुनवाई में स्पष्ट हो जाएगा कि JSSC CGL-2023 परीक्षा का भविष्य क्या होगा — क्या परीक्षा बरकरार रहेगी या नए सिरे से परीक्षा आयोजित करनी पड़ेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *