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उलिहातु की धरती पर एक साथ पहुंचे राज्यपाल–मुख्यमंत्री–केंद्रीय मंत्री, धरती आबा बिरसा मुंडा को दी श्रद्धांजलि

Birsa Jayanti

खूंटी: झारखंड की आत्मा, अस्मिता और संघर्ष के प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर आज खूंटी जिले के उलिहातु में ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार, माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन, और जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम धरती आबा की जन्मस्थली पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए।

परंपरागत विधि-विधान से पूजा-अर्चना
राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने उलिहातु में स्थित भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली और समाधि स्थल पर जनजातीय परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की।

इसके बाद तीनों गणमान्य अतिथियों ने—

  • धरती आबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण
  • पुष्पांजलि
  • और जनजातीय परंपराओं के सम्मान में विशेष पूजा करते हुए महानायक को नमन किया।
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धरती आबा के वंशजों को मिला विशेष सम्मान कार्यक्रम के दौरान तीनों नेताओं ने भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से मुलाकात की।
सम्मान के रूप में—

  • शॉल ओढ़ाकर
  • स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका अभिवादन किया गया।
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उलिहातु गांव के लोगों ने भी पारंपरिक नृत्य और ढोल-नगाड़ों के साथ अतिथियों का स्वागत किया। पूरा वातावरण जनजातीय गौरव और सांस्कृतिक धरोहर की भावना से भर उठा।

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झारखंड में ‘गौरव दिवस’ जैसा माहौल
धरती आबा की 150वीं जयंती के साथ झारखंड सरकार पूरे राज्य में—

  • जनजातीय गौरव दिवस
  • बिरसा मुंडा स्मृति कार्यक्रम
  • प्रदर्शनियां, सांस्कृतिक आयोजन
  • और ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष समारोह आयोजित कर रही है।
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उलिहातु का यह आयोजन इन कार्यक्रमों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

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बिरसा मुंडा की विरासत को सलाम
तीनों नेताओं ने यह संदेश दिया कि— “धरती आबा बिरसा मुंडा सिर्फ झारखंड नहीं, पूरे भारत के जनजातीय संघर्ष और आत्मगौरव के महान प्रतीक हैं।”

“उनकी 150वीं जयंती हम सभी के लिए प्रेरणा और गौरव का अवसर है।”

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