झारखंड शराब घोटाले की जांच और तेज, DC कर्ण सत्यार्थ ACB के निशाने पर
ACB का नोटिस जारी, केस में नए मोड़ की उम्मीद
झारखंड: झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच एक और महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया, जब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने तत्कालीन उत्पाद आयुक्त और मौजूदा पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थ को पूछताछ के लिए तलब किया। यह नोटिस उस समय जारी किया गया जब ACB इस घोटाले से जुड़े प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।
रामगढ़ DC फैज अक अहमद, IAS मुकेश और मनोज कुमार भी जांच के दायरे में
कर्ण सत्यार्थ इस केस में तलब किए जाने वाले चौथे बड़े अधिकारी हैं। इससे पहले ACB रामगढ़ के उपायुक्त फैज अक अहमद, वरिष्ठ IAS अधिकारी मुकेश कुमार और मनोज कुमार से एक-एक कर पूछताछ कर चुकी है। अधिकारियों से विभागीय प्रक्रियाओं, फाइलों की मूवमेंट, अनुमोदन और निर्णय संबंधी विवरण मांगे गए हैं।
इन पूछताछों से जांच एजेंसी की मंशा साफ हो जाती है कि वह इस मामले की पूरी कड़ी को समझने के लिए हर स्तर पर जिम्मेदारी तय करना चाहती है।
अधिकारियों पर FIR, विनय चौबे की गिरफ्तारी थी शुरुआती बड़ी कार्रवाई
इस मामले में उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय चौबे समेत 13 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है। FIR के बाद सबसे पहली गिरफ्तारी भी विनय चौबे की हुई थी, जो इस पूरे घोटाले के केंद्र में माने जा रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद विभागीय नोटिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और कई फाइलों से नए तथ्य सामने आए, जिनसे पूरे घोटाले की कहानी और स्पष्ट होती गई।
कर्ण सत्यार्थ की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?
कर्ण सत्यार्थ उस समय उत्पाद आयुक्त थे, जब इस घोटाले से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए थे।
ACB जानना चाहती है कि––
- कौन-कौन से आदेश उनके अनुमोदन से निकले?
- किन नीतिगत निर्णयों में वे प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे?
- क्या किसी स्तर पर प्रक्रियागत अनियमितता, दबाव या पक्षपात सामने आता है?
उनसे लिए जाने वाले बयान के आधार पर ACB आगे की कार्रवाई और संभावित आरोप तय करेगी।
घोटाले की पूरी परतें खोलने में जुटी ACB
ACB की जांच टीम कई पहलुओं को एक साथ जोड़ रही है, जिनमें शामिल हैं—
- शराब की खरीद और वितरण प्रक्रिया
- लाइसेंस व ठेका आवंटन में कथित हेरफेर
- राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी
- अवैध वसूली और कमीशन नेटवर्क
डिजिटल सबूत, आधिकारिक दस्तावेज और अधिकारियों की फाइल नोटिंग का मिलान कर एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले को कैसे अंजाम दिया गया।
IAS स्तर पर लगातार तलब से प्रशासनिक हलचल
IAS अधिकारियों के स्तर पर लगातार हो रही तलब और पूछताछ से झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में हलचल है। कई अधिकारी अपने पुराने रिकॉर्ड और फाइलें दोबारा खंगालने को मजबूर हैं। यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में––
- ACB कुछ और अफसरों को तलब कर सकती है
- जांच दायरा और बढ़ेगा
- नई गिरफ्तारी भी संभव है
ACB की ओर से साफ संकेत हैं कि वह किसी दबाव में आए बिना जांच आगे बढ़ाएगी।
जनता और सरकार दोनों की नजरें इस जांच पर टिकीं
शराब घोटाला आर्थिक भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला बनकर उभरा है, जिसमें सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। जनता और राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं कि––
- क्या जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी?
- क्या दोषियों को सजा मिलेगी?
- क्या घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी?
फिलहाल कर्ण सत्यार्थ को भेजा गया नोटिस इस बात का संकेत है कि ACB अभी जांच के शुरुआती चरण से कहीं आगे बढ़ चुकी है और आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ सकती हैं।








