निकाय चुनाव पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई, सरकार ने कहा– सभी प्रक्रियाएँ पूरी, आयोग ने मांगा 8 सप्ताह का समय
30 मार्च 2025 को अगली सुनवाई, राज्य निर्वाचन आयोग ने सीलबंद रिपोर्ट सौंपी
रांची: रांची नगर निगम और अन्य निकायों के चुनाव कराने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। निवर्तमान वार्ड पार्षद रोशनी खालको द्वारा दायर इस याचिका में राज्य सरकार पर चुनाव संबंधी प्रक्रिया लंबित रखने और कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं करने का आरोप लगाया गया था। अदालत में आज राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग दोनों की ओर से विस्तृत पक्ष प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंदा सेन की अदालत में हुई। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख 30 मार्च 2025 निर्धारित की है।
सरकार ने कहा— चुनाव की सभी प्रक्रिया पूरी, आयोग को सौंपे गए दस्तावेज
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता (एजी) ने अदालत को बताया कि शहरी निकाय चुनाव के लिए आवश्यक सभी प्रक्रियाएँ सरकार द्वारा पूरी कर ली गई हैं। महाधिवक्ता ने स्पष्ट कहा कि चुनाव से जुड़ी सभी फाइलें, आदेश और आवश्यक दस्तावेज राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपे जा चुके हैं, और आयोग ने उन्हें विधिवत स्वीकार भी कर लिया है।
अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि सरकार की ओर से देरी या प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा अब शेष नहीं है। इसलिए अब चुनाव कराने की जिम्मेदारी पूर्णतः राज्य निर्वाचन आयोग पर है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा— चुनाव कराने में लगेगा 8 सप्ताह, प्रक्रिया पूर्ण करने में चाहिए 45 दिन
सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता सुमित गाडोड़िया ने पक्ष रखते हुए बताया कि निकाय चुनाव की तैयारी और संपूर्ण प्रक्रिया के लिए आयोग को समय चाहिए। आयोग की ओर से दाखिल शपथ पत्र के अनुसार—
- चुनाव की घोषणा और मतदान के आयोजन में लगभग 8 सप्ताह का समय लगेगा।
- मतदान के बाद की प्रक्रिया, मतगणना और परिणाम अधिसूचना तथा अन्य औपचारिकताओं में लगभग 45 दिन और लगेंगे।
आयोग ने यह भी बताया कि शहरी निकाय चुनाव से संबंधित तमाम बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सीलबंद लिफाफे में हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दी गई है। अदालत ने रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लिया।
सीलबंद रिपोर्ट पर अदालत करेगी विस्तृत विचार
हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग दोनों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि सीलबंद रिपोर्ट का परीक्षण आवश्यक है।
अदालत ने टिप्पणी की कि—
“सभी पक्षों की दलीलों और निर्वाचन आयोग द्वारा दायर सीलबंद रिपोर्ट के विश्लेषण के बाद ही आगे का निर्देश जारी किया जाएगा।” इस प्रक्रिया के लिए अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 30 मार्च 2025 निर्धारित की।
प्रार्थी की दलील— सरकार आदेश अनुपालन में विफल, चुनाव जानबूझकर लटका रही है
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विनोद सिंह ने दलील दी कि नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य सरकार जानबूझकर प्रक्रियाएँ लंबित रख रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव न कराना संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लंघन है।
अधिवक्ता ने यह भी कहा कि पुराने पार्षदों और मेयरों का कार्यकाल समाप्त हुए महीनों बीत चुके हैं, लेकिन चुनाव अब तक नहीं कराया गया है, जिससे स्थानीय निकायों में निर्वाचित नेतृत्व का अभाव बना हुआ है।
कोर्टरूम में सरकार और आयोग आमने–सामने
सुनवाई के दौरान एक बार फिर यह स्थिति साफ हुई कि चुनाव को लेकर सरकार और आयोग के बीच जिम्मेदारियों को लेकर भ्रम या टकराव की स्थिति है। सरकार ने दावा किया कि उसने अपनी भूमिका पूरी कर दी है और प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं है।
वहीं आयोग ने कहा कि तकनीकी और कानूनी आधार पर उन्हें चुनाव कराने के लिए पर्याप्त समय चाहिए।
अदालत ने दोनों पक्षों को कहा कि चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे अनावश्यक रूप से नहीं रोका जा सकता।
रांची नगर निगम सहित 48 निकायों में चुनाव लंबित
झारखंड में रांची नगर निगम सहित कई नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में चुनाव कई महीनों से लंबित हैं।
इस वजह से इन निकायों में प्रशासक प्रणाली लागू है, जिससे स्थानीय स्तर पर जनता के प्रतिनिधि अनुपस्थित हैं। अदालत के इस मामले में सक्रिय होने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि चुनाव जल्द करवाए जा सकते हैं।
अगली सुनवाई महत्वपूर्ण— चुनाव की तारीख पर मिल सकती है स्पष्टता
30 मार्च 2025 को होने वाली अगली सुनवाई में—
- आयोग की सीलबंद रिपोर्ट की समीक्षा
- सरकार और आयोग के बीच समन्वय
- चुनाव की संभावित समय–सीमा पर अदालत स्पष्ट निर्देश दे सकती है। निकाय चुनाव की प्रतीक्षा कर रहे लाखों मतदाताओं की नजर अब हाईकोर्ट पर टिक गई है।








