रिम्स में भर्ती मरीजों के भोजन पर GST का मामला: हाईकोर्ट सख्त, रिम्स से मांगा स्पष्ट जवाब
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में भर्ती मरीजों को दिए जाने वाले भोजन पर जीएसटी (GST) लगाए जाने के मुद्दे पर अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में रिम्स प्रबंधन से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
अदालत ने रिम्स को निर्देश दिया है कि वह दाखिल रिट याचिका के पैरा 14 से 17 तक के बिंदुओं पर विशेष जवाब दाखिल करे। कोर्ट ने यह जानना चाहा है कि क्या पूर्व ठेकेदार जना एंटरप्राइजेज (Jana Enterprises) को मरीजों के लिए भोजन आपूर्ति पर जीएसटी से छूट दी गई थी। यदि छूट दी गई थी, तो उसका वैधानिक आधार क्या था, इसे स्पष्ट करना अनिवार्य होगा।
क्या मरीजों का भोजन हेल्थकेयर सेवा का हिस्सा है?
याचिका में यह तर्क दिया गया है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर दिया जाने वाला भोजन समेकित स्वास्थ्य सेवाओं (Composite Healthcare Services) का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में इस भोजन पर जीएसटी लागू नहीं होना चाहिए।
याचिकाकर्ता का कहना है कि मरीजों को दिया जाने वाला भोजन कोई व्यावसायिक सेवा नहीं, बल्कि इलाज की प्रक्रिया का हिस्सा है, इसलिए इस पर टैक्स वसूली अनुचित है।
पांच वर्षों तक GST नहीं लेने पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि पूर्व ठेकेदार से लगभग पांच वर्षों तक जीएसटी नहीं लिया गया, तो इसके पीछे कौन सा नियम, आदेश या सरकारी अधिसूचना थी।
खंडपीठ ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि बिना किसी वैध कानूनी आधार के जीएसटी से छूट दी गई है, तो इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर पड़ता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने रिम्स से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या मरीजों के भोजन को स्वास्थ्य सेवा की श्रेणी में रखते हुए छूट दी गई थी या फिर यह केवल प्रशासनिक निर्णय था। यदि ऐसा कोई निर्णय लिया गया था, तो उसका लिखित दस्तावेज और नियमों का हवाला पेश करना होगा।
याचिकाकर्ता की ओर से रखी गई दलील
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि देशभर में कई सरकारी अस्पतालों में मरीजों के भोजन को हेल्थकेयर सर्विस का हिस्सा मानते हुए जीएसटी से मुक्त रखा गया है।
अगली सुनवाई 9 मार्च को
झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि 9 मार्च निर्धारित की है। तब तक रिम्स प्रबंधन को अपना विस्तृत और स्पष्ट जवाब दाखिल करना होगा। इस फैसले पर न केवल रिम्स बल्कि राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों की भोजन व्यवस्था और टैक्स नीति भी प्रभावित हो सकती है।








