सयाल उरीमारी में राष्ट्रव्यापी हड़ताल सफल, कोयला उत्पादन ठप

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रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले के बरका सयाल क्षेत्र स्थित सयाल उरीमारी में संयुक्त ट्रेड यूनियन के आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। हड़ताल के दौरान मजदूरों ने काम पूरी तरह ठप कर दिया, जिससे सीसीएल की कई खदानों में कोयला उत्पादन प्रभावित हुआ।

संयुक्त ट्रेड यूनियन के नेतृत्व में मजदूरों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार मजदूर विरोधी कानून लागू कर श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

90% मजदूरों ने नहीं बनाई हाजिरी
बरका सयाल एरिया के सचिव राजू यादव ने बताया कि हड़ताल को सफल बनाने के लिए क्षेत्र के लगभग 90 प्रतिशत मजदूरों ने अपनी हाजिरी नहीं बनाई और किसी भी खदान में काम नहीं किया।

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उन्होंने कहा कि इस कारण सीसीएल आरई माइनिंग, आशीर्वाद, सैनिक, बिरसा पोटंगा सहित अन्य कंपनियों का कार्य पूरी तरह ठप हो गया। इससे साफ है कि हड़ताल पूरी तरह सफल रही और मजदूरों में सरकार की नीतियों को लेकर गहरा असंतोष है।

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श्रम कानूनों के खिलाफ उग्र विरोध
ट्रेड यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को मजदूरों के हितों के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि इन कानूनों से रोजगार असुरक्षित होगा और निजीकरण तथा आउटसोर्सिंग को बढ़ावा मिलेगा। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार यूनियनों को कमजोर कर श्रमिक आंदोलन की आवाज दबाना चाहती है, लेकिन मजदूर इसके खिलाफ संघर्ष तेज करेंगे।

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आंदोलन तेज करने की चेतावनी
यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मजदूर विरोधी नीतियां वापस नहीं लीं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध कार्यक्रम चलाए जाएंगे। हड़ताल के दौरान डॉ. जी.आर. भगत, गणेश राम, सीताराम किस्कू सहित कई यूनियन नेता और मजदूर बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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उत्पादन पर पड़ा असर
हड़ताल के कारण कोयला उत्पादन ठप रहने से सीसीएल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह आंदोलन लंबा चला, तो बिजली उत्पादन और उद्योगों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

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