रांची में सरदार पटेल की 150वीं जयंती पर भव्य आयोजन, ‘लौह पुरुष’ के योगदान को किया गया याद

Sardar Patel

रांची: देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और “लौह पुरुष” के नाम से विख्यात सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रांची के आर्यभट्ट सभागार में एक भव्य और गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, रांची विधायक सीपी सिंह और रांची महापौर रोशनी खलखो सहित कई गणमान्य लोग मंच पर मौजूद रहे।

राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ आयोजन
यह आयोजन न केवल सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देने का अवसर था, बल्कि उनके विचारों और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का भी एक प्रयास था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। बच्चों ने सरदार पटेल के जीवन, उनके संघर्ष और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को जानने में गहरी रुचि दिखाई।

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“लौह पुरुष” के योगदान को किया गया याद
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सरदार पटेल के अद्वितीय योगदान को विस्तार से याद किया। उन्हें “लौह पुरुष” इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए असाधारण दृढ़ता और नेतृत्व का परिचय दिया। स्वतंत्रता के बाद भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी—विभिन्न रियासतों को एकजुट कर एक राष्ट्र का निर्माण करना।

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500 से अधिक रियासतों का विलय
सरदार पटेल ने अपने दूरदर्शी नेतृत्व और कूटनीतिक कौशल से 500 से अधिक रियासतों का भारत में विलय कर देश को एक सूत्र में पिरोने का ऐतिहासिक कार्य किया। यह कार्य इतना जटिल और चुनौतीपूर्ण था कि यदि उस समय यह सफल नहीं होता, तो आज भारत का स्वरूप बिल्कुल अलग हो सकता था।

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बच्चों में दिखा उत्साह और जिज्ञासा
कार्यक्रम में शामिल स्कूली बच्चों ने सरदार पटेल के विचारों को जानने और समझने में विशेष रुचि दिखाई। यह पहल नई पीढ़ी को देश के इतिहास और महान नेताओं के योगदान से जोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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नेतृत्व का संदेश: एकता ही राष्ट्र की शक्ति
मुख्य अतिथि और अन्य वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज भारत जिस मजबूती और स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें सरदार पटेल का योगदान अमूल्य है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सरदार पटेल के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं, क्योंकि वे हमें एकता, अखंडता और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देते हैं।

150वीं जयंती: देशभर में आयोजन
गौरतलब है कि सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर को हुआ था और इस वर्ष उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य उनके विचारों, सिद्धांतों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। रांची में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक श्रद्धांजलि समारोह था, बल्कि यह देश की एकता और अखंडता के प्रति प्रतिबद्धता को भी दोहराने का अवसर बना।

सरदार पटेल के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने स्वतंत्रता के समय थे। उनके विचार आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत, संगठित और सशक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

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