भारत का बड़ा रणनीतिक कदम: 6 महीने में 104 टन सोना वापस, RBI की नई सोच
वैश्विक संकट के बीच ‘सुरक्षा कवच’ बन रहा गोल्ड रिजर्व
नई दिल्ली: बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत ने अपने सोने के भंडार को लेकर बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट (अक्टूबर 2025 से मार्च 2026) के अनुसार, देश ने सिर्फ 6 महीनों में 104.23 टन सोना विदेशों से वापस मंगाया है। इस कदम के बाद भारत के कुल 880.52 टन सोने में से लगभग 77% यानी करीब 680 टन अब देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है, जबकि बाकी 197.67 टन सोना अभी भी विदेशों में रखा हुआ है।
पहले विदेशों में रखना माना जाता था सुरक्षित
लंबे समय तक भारत सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व को लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों में रखते थे। इसका कारण वहां की सुरक्षा व्यवस्था, आसान ट्रेडिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन की सुविधा थी। लेकिन अब वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, जिससे इस सोच में भी बड़ा बदलाव आया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद बदली रणनीति
इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसे मामलों ने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों को सतर्क कर दिया है। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि विदेशों में रखे गए भंडार पर आपात स्थिति में नियंत्रण खोने का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि अब देश अपने सोने को वापस लाकर घरेलू भंडार में सुरक्षित रखने पर जोर दे रहे हैं।
अब सिर्फ संपत्ति नहीं, रणनीतिक सुरक्षा
पहले सोने को केवल एक वित्तीय संपत्ति के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब इसकी भूमिका बदल गई है। केंद्रीय बैंक अब गोल्ड को रणनीतिक सुरक्षा (Strategic Security Asset) के रूप में देखने लगे हैं। भारत का यह कदम भी इसी नई सोच को दर्शाता है, जहां आर्थिक मजबूती के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ी हिस्सेदारी
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई है। यह संकेत है कि देश धीरे-धीरे डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम कर रहा है और अपने भंडार को अधिक स्थिर और सुरक्षित बना रहा है।
क्या होगा इसका असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। घरेलू स्तर पर सोना रखने से संकट के समय तुरंत उपयोग की सुविधा मिलेगी और बाहरी जोखिम कम होंगे। साथ ही, यह वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक रणनीति और आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करता है। भारत का विदेशों से सोना वापस लाना सिर्फ एक आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक कदम है। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में यह फैसला देश की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम साबित हो सकता है। आने वाले समय में अन्य देश भी इसी राह पर चलते नजर आ सकते हैं।





