1000 से ज्यादा फेक वेबसाइट्स एक्टिव, टिकट और फ्री स्ट्रीमिंग के जरिए लोगों को बना रहे शिकार

IPL Cyber Scam

IPL के नाम पर बड़ा साइबर स्कैम!

नई दिल्लीः Indian Premier League के बढ़ते क्रेज का अब साइबर अपराधी भी जमकर फायदा उठा रहे हैं। साइबर सिक्योरिटी फर्म CloudSEK ने दावा किया है कि उसने IPL से जुड़े 1,000 से ज्यादा नकली डोमेन और वेबसाइट्स की पहचान की है, जो क्रिकेट फैंस को निशाना बना रही हैं। इनमें फेक टिकट बेचने वाली वेबसाइट्स से लेकर नकली फ्री लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तक शामिल हैं।

600 से ज्यादा फेक टिकट वेबसाइट्स का खुलासा
CloudSEK की रिपोर्ट के मुताबिक 600 से ज्यादा फर्जी डोमेन ऐसे मिले हैं, जो IPL टिकट बेचने के नाम पर लोगों से ठगी कर रहे हैं। ये वेबसाइट्स असली टिकटिंग प्लेटफॉर्म की तरह दिखती हैं। साइबर ठग भरोसा जीतने के लिए बड़े-बड़े लोगो, डिजाइन और लेआउट की हूबहू नकल करते हैं।

यूजर्स को सीट चुनने, नाम-पता भरने और फिर UPI, कार्ड, QR कोड या अन्य पेमेंट गेटवे के जरिए पैसे जमा करने के लिए कहा जाता है। पेमेंट पूरा होने के बाद लोगों को नकली PDF टिकट भेज दिए जाते हैं, जिनमें फर्जी बुकिंग ID और QR कोड मौजूद होते हैं।धोखाधड़ी का पता तब चलता है, जब स्टेडियम के गेट पर एंट्री नहीं मिलती।

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फ्री IPL स्ट्रीमिंग के नाम पर मैलवेयर अटैक
रिपोर्ट में 400 से ज्यादा नकली “फ्री IPL लाइव स्ट्रीमिंग” वेबसाइट्स की पहचान की गई है। ये वेबसाइट्स सर्च इंजन पर “Free IPL Live Match” या मैच से जुड़ी लोकप्रिय सर्च क्वेरी के जरिए लोगों तक पहुंचती हैं। लेकिन असल में ये साइट्स लाइव मैच दिखाने के बजाय यूजर्स के मोबाइल और लैपटॉप में मैलवेयर इंस्टॉल कर देती हैं। कई मामलों में ये वेबसाइट्स यूजर्स को संदिग्ध लिंक पर रीडायरेक्ट करती हैं या लॉगिन क्रेडेंशियल चुराने की कोशिश करती हैं।

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कैसे काम कर रहा है यह साइबर नेटवर्क?
CloudSEK सिक्योरिटी कंसल्टेंट सौरजीत मजूमदार के मुताबिक ये स्कैम अब पूरी तरह “इंडस्ट्रियलाइज्ड” हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि स्कैमर्स सिर्फ फेक टिकट बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे यूजर्स के व्यवहार को भी ट्रैक कर रहे हैं। कुछ वेबसाइट्स Meta Pixel जैसे ट्रैकिंग टूल का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे वे यह पता लगाते हैं कि कौन यूजर टिकट खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है। इसके जरिए साइबर अपराधी कीमतें बदलते हैं, पेमेंट वेरिफाई करते हैं और यूजर्स का डेटा इकट्ठा करते हैं, जिसे बाद में दूसरे स्कैम में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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क्रिकेट फैंस को क्यों बनाया जा रहा निशाना?
रिपोर्ट में कहा गया है कि IPL का क्रेज, भावनात्मक जुड़ाव और टिकट पाने की जल्दबाजी साइबर अपराधियों के लिए बड़ा मौका बन चुकी है। खासतौर पर बड़े मैचों के दौरान लोग आखिरी समय में टिकट या फ्री स्ट्रीमिंग की तलाश करते हैं और इसी जल्दबाजी में फर्जी वेबसाइट्स के जाल में फंस जाते हैं।

कैसे बचें ऐसे स्कैम से?
साइबर एक्सपर्ट्स ने लोगों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत ऐप के जरिए ही टिकट खरीदें। किसी भी अनजान लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन या “फ्री लाइव स्ट्रीमिंग” ऑफर पर क्लिक करने से बचने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पेमेंट करने से पहले वेबसाइट का URL और सिक्योरिटी सर्टिफिकेट जरूर जांचने को कहा गया है।

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