थैलेसीमिया और सिकल सेल मरीजों के लिए रेलवे रियायती पास की मांग, DRM रांची को सौंपा गया ज्ञापन
रांची: रक्त विकार से जूझ रहे मरीजों को राहत दिलाने की मांग को लेकर लहू बोलेगा रक्तदान संगठन और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने रांची रेलवे मंडल के डीआरएम के.एन. सिंह से मुलाकात कर पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा। हटिया स्थित डीआरएम कार्यालय में हुई इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया, अप्लास्टिक एनीमिया और हीमोफीलिया जैसे गंभीर रक्त विकार से पीड़ित मरीजों के लिए भारतीय रेलवे में रियायती पास जारी करने की मांग उठाई।
“स्थायी दिव्यांग श्रेणी में होने के बावजूद नहीं मिल रहा लाभ”
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ये सभी गंभीर और असाध्य रोग हैं तथा दिव्यांगता की स्थायी श्रेणी में आते हैं। इसके बावजूद भारतीय रेलवे की ओर से ऐसे मरीजों को रियायती रेलवे पास जारी नहीं किया जाता, जिससे इलाज के लिए लगातार यात्रा करने वाले मरीजों और उनके परिवारों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।
संगठन ने मांग की कि दिव्यांगता कानून और मानवीय आधार पर इन मरीजों के लिए स्थायी रेलवे रियायती पास जारी करने का स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किया जाए।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों व्यवस्था रखने की मांग
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि रेलवे पास जारी करने की प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराई जाए। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि कई ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को ऑनलाइन प्रक्रिया में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ऑफलाइन व्यवस्था जारी रहना जरूरी है।
रेलवे मंडल में रक्तदान शिविर चलाने की मांग
संगठन ने रेलवे प्रशासन से हटिया और रांची रेलवे मंडल में रक्तदान महादान शिविर चलाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसे रोगों से पीड़ित बच्चों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में रेलवे स्तर पर रक्तदान अभियान शुरू होने से जरूरतमंद मरीजों को बड़ी मदद मिल सकती है।
बच्चों के लिए शिक्षा और प्रतिभा विकास पर भी जोर
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में मांग की कि इन गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के लिए पेंटिंग, नाटक, शिक्षा और प्रतिभा विकास से जुड़े कार्यक्रम भी चलाए जाएं। साथ ही इलाज और दवाइयों में मानवीय सहयोग देने की भी अपील की गई।
DRM ने गंभीरता से सुनी मांगें
डीआरएम के.एन. सिंह ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक जानकारी जुटाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में रेलवे बोर्ड स्तर पर भी जानकारी और दिशा-निर्देश लेने की आवश्यकता होगी। डीआरएम ने आश्वासन दिया कि संबंधित रेलवे पास और दिव्यांगता से जुड़े अधिकारियों के साथ चर्चा कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
लगातार आवाज उठा रहे सामाजिक संगठन
लहू बोलेगा रक्तदान संगठन और झारखंड थैलेसीमिया पीड़ित एसोसिएशन लंबे समय से रक्त विकार से पीड़ित मरीजों की समस्याओं को लेकर सक्रिय हैं। संगठन नियमित रक्तदान शिविर, जागरूकता अभियान और मरीजों के इलाज में सहयोग जैसे कार्य करते रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे ये लोग
डीआरएम से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में नदीम खान, संजय टोप्पो, सुजाता कुमारी, विमला कच्छप, संगीता कुमारी, शांति देवी, सुमित्रा देवी और केशमती देवी शामिल थीं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि रेलवे में रियायती पास की सुविधा मिलने से हजारों मरीजों और उनके परिवारों को राहत मिलेगी।
क्या है थैलेसीमिया और सिकल सेल रोग?
Thalassemia और Sickle Cell Disease गंभीर आनुवांशिक रक्त विकार हैं, जिनमें मरीजों को नियमित रक्त चढ़ाने और लगातार इलाज की आवश्यकता होती है। ऐसे मरीजों को अक्सर बड़े शहरों के अस्पतालों में इलाज के लिए बार-बार यात्रा करनी पड़ती है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ जाता है।
रांची में सामाजिक संगठनों द्वारा उठाई गई यह मांग रक्त विकार से जूझ रहे हजारों मरीजों के लिए राहत की उम्मीद बनकर सामने आई है। अब नजर रेलवे प्रशासन और रेलवे बोर्ड के अगले कदम पर रहेगी कि क्या इन मरीजों को रेलवे यात्रा में विशेष रियायत और मानवीय सुविधा मिल पाती है या नहीं।






