इंडिगो संकट पर मंत्रालय सख्त, CEO पीटर एल्बर्स को किया तलब

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नई दिल्ली: इंडिगो एयरलाइंस की उड़ान सेवाओं में लगातार आ रही बाधाओं और यात्रियों की बढ़ती शिकायतों के बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने कड़ा रुख अपनाया है। इसी कड़ी में मंगलवार को इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पीटर एल्बर्स को मंत्रालय के मुख्यालय बुलाया गया। बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू और मंत्रालय के सचिव समीर सिन्हा मौजूद रहे।

सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में इंडिगो की हालिया उड़ान रद्द होने की घटनाओं, ऑपरेशनल प्लानिंग, क्रू मैनेजमेंट और यात्रियों को हो रही असुविधा जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्रालय ने साफ संकेत दिया कि देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन से इस तरह की अव्यवस्था किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।

बीते कुछ दिनों में इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं या विलंबित रहीं, जिससे हजारों यात्री देश के अलग-अलग हवाई अड्डों पर फंस गए। हालात ऐसे बने कि आखिरी समय में टिकट बुक करने वाले यात्रियों को काफी ऊंची कीमतें चुकानी पड़ीं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद नागरिक उड्डयन नियामक DGCA ने भी इंडिगो से विस्तृत रिपोर्ट मांगी और कारण बताओ नोटिस जारी किया।

मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि बैठक के दौरान पीटर एल्बर्स से यह स्पष्ट करने को कहा गया कि क्रू-रोस्टरिंग, सीमित स्टाफ और तकनीकी समस्याओं के बावजूद वैकल्पिक व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई। मंत्री राम मोहन नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि है और एयरलाइंस को किसी भी परिस्थिति में न्यूनतम सेवा मानकों का पालन करना ही होगा।

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बैठक में यह भी चर्चा हुई कि भविष्य में इसी तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए इंडिगो किस तरह की सुधारात्मक और दीर्घकालिक रणनीति अपनाएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यदि सुधार में देरी या लापरवाही दिखाई देती है, तो नियामकीय कार्रवाई से पीछे नहीं हटा जाएगा।

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इंडिगो प्रबंधन की ओर से मंत्रालय को भरोसा दिलाया गया कि संचालन व्यवस्था को सामान्य करने के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। कंपनी ने हाल के दिनों में अपनी ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) में सुधार का दावा भी किया है और कहा है कि अधिकांश रूट्स पर सेवाएं फिर से सामान्य स्थिति में लौट रही हैं।

हालांकि, विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक एयरलाइन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर में संसाधन प्रबंधन और नियोजन की चुनौतियों को भी उजागर करता है। उनका कहना है कि मंत्रालय और DGCA की सख्ती आने वाले समय में अन्य एयरलाइंस के लिए भी एक कड़ा संदेश होगी।

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