राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विष्णुपद मंदिर में किया पिंडदान, पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गया के विष्णुपद मंदिर में किया पिंडदानबिहार के गया में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया धार्मिक अनुष्ठान, पितृपक्ष में पिंडदान कर दी श्रद्धांजलि
गया/पटना : देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को बिहार के ऐतिहासिक शहर गया पहुँचीं, जहाँ उन्होंने विष्णुपद मंदिर में ‘पिंडदान’ और ‘जल तर्पण’ किया। राष्ट्रपति ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ यह धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न किया। उनके इस दौरे ने पितृपक्ष के दौरान गया की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ा दी है।
राष्ट्रपति का गया आगमन
सुबह विशेष विमान से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गया पहुँचीं। एयरपोर्ट पर राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच उनका काफिला विष्णुपद मंदिर पहुँचा।
विष्णुपद मंदिर की महत्ता
गया का विष्णुपद मंदिर हिंदू धर्म में पितृपक्ष के दौरान पिंडदान और तर्पण के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ हर साल देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने आते हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने भी इसी परंपरा के तहत अपने पूर्वजों के लिए यह अनुष्ठान किया।
पारंपरिक विधि से पिंडदान
मंदिर के पुरोहितों की अगुवाई में राष्ट्रपति ने सभी पारंपरिक विधियों के अनुसार ‘पिंडदान’ और ‘जल तर्पण’ किया। उनके साथ मंदिर प्रशासन के चुनिंदा पुजारी ही मौजूद थे। इस दौरान मंत्रोच्चारण से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए विष्णुपद मंदिर परिसर और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस, एसपीजी और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। श्रद्धालुओं के प्रवेश पर भी अस्थायी रोक लगाई गई ताकि अनुष्ठान शांति से सम्पन्न हो सके।
धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस कदम को धार्मिक आस्था और पारंपरिक मूल्यों के प्रति उनके सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्होंने आमजन की तरह अपने पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने की मिसाल पेश की।
गया के लोगों में उत्साह
राष्ट्रपति के आगमन से गया के स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा गया। हालांकि सुरक्षा कारणों से लोगों को दूर से ही राष्ट्रपति को देखने का मौका मिला, लेकिन मंदिर प्रशासन ने कहा कि राष्ट्रपति के पिंडदान ने इस वर्ष पितृपक्ष के धार्मिक महत्व को और बढ़ा दिया है।
पितृपक्ष में गया की परंपरा
गया का पितृपक्ष मेला ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर साल यहाँ लाखों लोग पिंडदान के लिए जुटते हैं। विष्णुपद मंदिर के अलावा फल्गु नदी के तट पर भी श्राद्धकर्म और तर्पण होता है। राष्ट्रपति का इस समय यहाँ पहुँचना इस परंपरा के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाता है।
नेताओं ने स्वागत किया
राष्ट्रपति के इस धार्मिक अनुष्ठान पर बिहार के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का यह कदम हमारी संस्कृति और आस्था को नई दिशा देता है। वहीं स्थानीय प्रशासन ने इसे गया के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।
राष्ट्रपति का संदेश
अनुष्ठान के बाद राष्ट्रपति ने संक्षिप्त बातचीत में कहा कि यह अनुष्ठान हमारी संस्कृति का हिस्सा है और हर व्यक्ति को अपने पूर्वजों की स्मृति में यह कर्म करना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी पारंपरिक संस्कारों को निभाने और समाज में आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का गया दौरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि यह भारतीय परंपरा, संस्कृति और आस्था के प्रति सम्मान का संदेश भी था। विष्णुपद मंदिर में उनके पिंडदान ने देश और दुनिया को यह दिखा दिया कि संवैधानिक पद पर रहते हुए भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ाव को बनाए रखा जा सकता है।








