सोनम वांगचुक ने खारिज किए केंद्र के आरोप, कहा- ‘मुझे बलि का बकरा बनाया’

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लेह: हाल ही में लद्दाख के लेह जिले में हिंसा और झड़पों के बीच, केंद्र सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन वांगचुक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है।

केंद्र पर आरोपों को किया खारिज
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार वांगचुक ने कहा कि सरकार अपनी चतुराई दिखा सकती है, लेकिन यह बुद्धिमानी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन और भूख हड़ताल केवल लद्दाख के युवाओं और लोगों के अधिकारों को लेकर थी, हिंसा को भड़काने का कोई इरादा नहीं था।

युवाओं की आक्रोश भड़काने का आरोप निराधार
फोन पर दिए बयान में वांगचुक ने कहा कि केंद्र ने उन्हें ‘हिंसा का मुख्य प्रेरक’ बताकर दोषी ठहरा दिया, जबकि उनकी गतिविधियाँ शांतिपूर्ण थीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी प्रदर्शनकारी स्वयं अपने निर्णय और भावनाओं से सक्रिय हुए थे, और यह गलत है कि किसी एक व्यक्ति को इसका जिम्मेदार ठहराया जाए।

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राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग
सोनम वांगचुक और उनके समर्थक लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि यह क्षेत्र आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक रूप से विशेष अधिकार का हकदार है, और उनका आंदोलन केवल यही सुनिश्चित करने के लिए था।

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सोनम वांगचुक का बयान और भविष्य की रणनीति
वांगचुक ने कहा कि सरकार ने उन्हें बलि का बकरा बना दिया है, लेकिन उनका आंदोलन लद्दाख के युवाओं और समाज के हित में जारी रहेगा। उन्होंने सभी को शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने और सरकार से संवाद स्थापित करने की अपील की।

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