गांव वालों ने दिखाई मिसाल — खुद बनाया कच्चा सड़क, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

Administrative negligence

ग्रामीणों ने खुद उठाई जिम्मेदारी

पाकुड़ से सुमित भगत की रिपोर्ट: झारखंड के पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड के बड़ा बास्को पहाड़ गांव में ग्रामीणों ने विकास की मिसाल पेश की है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग अनसुनी होने के बाद ग्रामीणों ने खुद ही कच्ची सड़क बनाने का बीड़ा उठा लिया। गुरुवार को गांव के लोग सामूहिक रूप से सड़क निर्माण में जुट गए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी समस्या पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। बरसात के मौसम में गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, इसलिए अब इंतजार छोड़कर उन्होंने खुद ही कदम उठाया।

फावड़ा और कुदाल से सड़क निर्माण की शुरुआत
ग्रामीणों ने सामूहिक श्रमदान के तहत फावड़ा और कुदाल से सड़क बनाना शुरू किया। इसमें गांव के युवक, युवतियां, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। सभी ने एकजुट होकर इस अभियान को “गांव की जरूरत” बताया।

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गांव वालों ने कहा,

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“हमने कई बार प्रशासन को आवेदन दिया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब हमें किसी के भरोसे नहीं बैठना है। अपने पैरों पर खड़ा होना ही बेहतर है।”

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गांव के मुख्य रास्ते को जोड़ने वाली यह सड़क बरसात में कीचड़ और पानी से लथपथ रहती थी। ऐसे में बच्चों का स्कूल जाना, बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाना और दैनिक आवागमन बेहद कठिन हो जाता था।

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बरसात में और बिगड़ जाती है स्थिति
स्थानीय निवासियों ने बताया कि बरसात के दिनों में सड़क की हालत और भी खराब हो जाती है। सड़क के अभाव में गांव पूरी तरह से बाकी दुनिया से कट जाता है। न तो एंबुलेंस गांव तक पहुंच पाती है और न ही कोई आपातकालीन सेवा।

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गांव की महिला सीता पहाड़िन ने बताया,

“अगर किसी को रात में तबीयत खराब हो जाए तो अस्पताल तक पहुंचाना किसी युद्ध से कम नहीं होता। कई बार हम बीमारों को चारपाई पर उठाकर ले गए हैं।”

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प्रशासन पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने जिला और प्रखंड प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि वर्षों से लिखित आवेदन और जनसुनवाई में अपनी बात रखने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

गांव के जयप्रकाश पहाड़िया ने कहा,

“हमारे गांव की सड़क अगर बन जाती तो हमें यह स्थिति नहीं देखनी पड़ती। सरकार विकास के दावे तो बहुत करती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब गांव में लोग खुद पहल कर सड़क बना रहे हैं तो प्रशासन को भी आगे आकर मदद करनी चाहिए।

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उम्मीद — अब प्रशासन लेगा संज्ञान
गांव वालों को उम्मीद है कि जब यह खबर प्रशासन तक पहुंचेगी तो सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से अपील की है कि इस अस्थायी सड़क को पक्की सड़क में बदला जाए ताकि भविष्य में आवागमन की समस्या स्थायी रूप से खत्म हो सके। गांव में सड़क निर्माण अभियान में शामिल ग्रामीणों में जयप्रकाश पहाड़िया, शोबना पहाड़िया, जमुना पहाड़िया, देवा पहाड़िया, सीताराम पहाड़िया, दुर्गी पहाड़िन, सीता पहाड़िन, कमला पहाड़िया, जबरा पहाड़िया, कालू पहाड़िया, रामी पहाड़िन और चंद्रदेव पहाड़िया शामिल रहे।

ग्रामीण विकास योजनाओं की जमीनी सच्चाई
गौरतलब है कि राज्य और केंद्र सरकार द्वारा ग्रामीण सड़कों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इन योजनाओं का लाभ सभी गांवों तक नहीं पहुंच पाता। प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के बावजूद कई गांव आज भी सड़क से वंचित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ग्राम स्तर पर योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े तो इस तरह की समस्याओं को आसानी से दूर किया जा सकता है।

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विकास के लिए एकजुटता जरूरी
बड़ा बास्को पहाड़ गांव के ग्रामीणों की यह पहल केवल सड़क निर्माण नहीं बल्कि स्वावलंबन और एकजुटता की मिसाल है। जिस काम को प्रशासन वर्षों में नहीं कर सका, उसे ग्रामीणों ने खुद शुरू कर दिखाया। अब प्रशासन पर जिम्मेदारी है कि वह इस प्रयास को आगे बढ़ाए और गांव को बेहतर सड़क सुविधा उपलब्ध कराए। क्योंकि विकास का रास्ता गांवों से होकर ही जाता है।

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