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भारत में आतंकवाद का नया चेहरा: व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का उभार

White Collar Terror

उच्च शिक्षित युवाओं का डिजिटल कट्टरपंथ की ओर खतरनाक झुकाव

नयी दिल्ली: भारत एक नए तरह के घरेलू आतंकवाद के दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां खतरा सिर्फ हथियारबंद लड़ाकों से नहीं, बल्कि लैपटॉप और स्मार्टफोन चलाने वाले उच्च शिक्षित युवा वर्ग से भी है। इस उभरते खतरे को विशेषज्ञ “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” कह रहे हैं, क्योंकि इसमें शामिल लोग डॉक्टर, इंजीनियर, IT विशेषज्ञ, शिक्षक और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के छात्र हैं। यह वह आतंकी ढांचा है, जो न जमीन पर दिखता है और न ही किसी पारंपरिक संगठन के प्रतीक से जुड़ा है, लेकिन इसका प्रभाव बेहद गहरा हो सकता है।


पुराने मॉड्यूल के टूटने के बाद खाली हुए स्पेस को नए नेटवर्क ने भरा
भारत में 2011 तक इंडियन मुजाहिदीन (IM) सबसे बड़ा घरेलू आतंकी संगठन माना जाता था। इसकी गतिविधियाँ दिल्ली, मुंबई, पुणे, वाराणसी और जयपुर जैसे शहरों को कई बार दहला चुकी थीं। लेकिन 2013 में यासीन भटकल और 2018 में अब्दुल सुभान कुरैशी की गिरफ्तारी के बाद IM का नेटवर्क लगभग खत्म हो गया। इसके बाद 2018 से 2024 तक देश में अपेक्षाकृत शांति देखने को मिली और बड़े आतंकी हमले सीमित रहे। उरी, पुलवामा और 2025 का पहलगाम हमला भले ही बड़े थे, पर वे सभी पाकिस्तान आधारित संगठनों द्वारा कराए गए थे। इस दौरान भीतर ही भीतर एक नया, शांत लेकिन बेहद ख़तरनाक घरेलू नेटवर्क आकार ले रहा था।


आतंकवाद में इंजीनियरिंग और साइबर स्किल्स का प्रवेश
नए मॉड्यूल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें शामिल लोग समाज के शिक्षित और पेशेवर तबके से आते हैं। वे खुलकर किसी आतंकी संगठन का हिस्सा नहीं होते, बल्कि छोटे-छोटे स्लीपर सेल बनाकर काम करते हैं। इनमें शामिल डॉक्टर, इंजीनियर और IT प्रोफेशनल अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर रहे हैं। यह परिवर्तन बताता है कि आतंकवाद अब केवल हथियारों का खेल नहीं रहा, बल्कि यह साइबर, डेटा, डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन का खेल बन गया है।

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ISIS और अल-कायदा की डिजिटल लाइब्रेरी से प्रेरित नई पीढ़ी
नए मॉड्यूल का कट्टरपंथ लगभग पूरी तरह ऑनलाइन आधारित है। ISIS की डिजिटल पत्रिकाएँ, वीडियो, गाइडबुक और अल-कायदा की ऑनलाइन प्रचार सामग्री आज भी भारतीय युवाओं को प्रभावित कर रही है। यह कंटेंट उन्हें एक वैकल्पिक पहचान, विरोध का रास्ता और हिंसा को जायज़ ठहराने वाली विचारधारा प्रदान करता है। डिजिटल कट्टरपंथ की इस invisible university ने आतंकवाद को बेहद आसान और आधुनिक बना दिया है।

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व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल और डार्क वेब पर ऑपरेशन
ये मॉड्यूल बुद्धिमत्ता और तकनीक का उपयोग करते हुए संचार के लिए व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, सिग्नल जैसी एन्क्रिप्टेड ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। कई मामलों में सुरक्षा एजेंसियों को क्लोन ऐप्स, TOR ब्राउज़र और डार्क वेब आधारित चैटरूम भी मिले हैं, जिनमें हमले की रणनीतियाँ और भर्ती प्रक्रिया पर चर्चा होती है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह सबसे कठिन चुनौती है क्योंकि डिजिटल footprints बेहद सीमित होते हैं और इन्हें ट्रैक करना तकनीकी रूप से जटिल हो जाता है।

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कम निवेश में हाई-इम्पैक्ट प्लानिंग संभव

पुराने आतंकवादी मॉड्यूल जहां बड़े पैमाने पर फंडिंग पर निर्भर थे, वहीं नए मॉड्यूल छोटे लेकिन लगातार आने वाले डिजिटल दान, क्रिप्टोकरेंसी, हवाला और प्रीपेड कार्ड के जरिए फंड इकट्ठा करते हैं। इनके लिए लाखों का बजट जरूरी नहीं होता। बस एक स्मार्टफोन, इंटरनेट, VPN और कुछ डिजिटल वॉलेट काफी हैं। इसका मतलब है कि आतंकवाद अब कम लागत वाला, हाई-टेक और ज्यादा कठिनाई से पकड़ में आने वाला रूप ले चुका है।

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अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क के साथ संपर्क की पुष्टि
हालिया जांचों से यह तथ्य सामने आया है कि भारत में सक्रिय कई मॉड्यूल तुर्किये और पाकिस्तान में बैठे संचालकों से जुड़े हैं। ये विदेशी हैंडलर सुरक्षित डिजिटल चैनलों के माध्यम से भारतीय स्लीपर सेल्स को सलाह, कंटेंट और निर्देश भेजते हैं। कई गिरफ्तारियों में यह भी साबित हुआ है कि भारत में हमले की तैयारी कर रहे युवाओं को विदेशी जिहादी समूहों द्वारा वित्तीय सहायता तथा ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा रही थी।


शिक्षित, अदृश्य और तकनीकी रूप से सक्षम आतंकी सबसे बड़ा खतरा

White Collar Terror Module इस सदी के उस आतंकवाद का प्रतिनिधित्व करता है, जो न बंदूक की आवाज़ में दिखाई देता है और न सीमाओं के पार से आने वाले घुसपैठियों में। यह खतरा है घर के भीतर बैठा, तकनीक की भाषा बोलने वाला, समाज में घुला-मिला, उच्च शिक्षित आतंकवादी। भारत के लिए यह एक चेतावनी है कि आने वाले वर्षों में आतंकवाद की प्रकृति पूरी तरह बदल चुकी है और इसकी निगरानी के लिए पारंपरिक रणनीतियों से आगे बढ़कर नई टेक्नोलॉजी, साइबर इंटेलिजेंस और डिजिटल डिफेंस की आवश्यकता है।

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